26 अगस्त 2026 हरियाणा के सिरसा में एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) ने तेजी से घटती गौरैया की आबादी को बचाने के लिए विशेष पहल शुरू की है। संगठन ने गौरैयों के लिए सुरक्षित घोंसले और आश्रय स्थल तैयार किए हैं, ताकि इन छोटे पक्षियों को रहने और प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण मिल सके।
गौरैयों के लिए बनाए सुरक्षित ठिकाने
NGO की ओर से शहर और आसपास के इलाकों में गौरैयों के लिए कृत्रिम घोंसले लगाए जा रहे हैं। इन सुरक्षित ठिकानों का उद्देश्य गौरैयों को घोंसला बनाने और बच्चों को पालने के लिए जगह उपलब्ध कराना है।
संगठन के कार्यकर्ताओं का कहना है कि आधुनिक निर्माण और प्राकृतिक आवासों में कमी के कारण गौरैयों को सुरक्षित स्थान मिलना मुश्किल हो रहा है।
घटती गौरैया आबादी चिंता का विषय
गौरैया लंबे समय से मानव बस्तियों के आसपास रहने वाला प्रमुख पक्षी रही है। लेकिन शहरीकरण, पुराने भवनों में कमी, घोंसले बनाने की जगहों का खत्म होना और भोजन-पानी के स्रोतों में कमी जैसे कारणों से कई क्षेत्रों में इनकी संख्या कम हुई है।
सिरसा में भी गौरैयों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए स्थानीय स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
लोगों को अभियान से जोड़ने की कोशिश
NGO स्थानीय लोगों से भी अपील कर रहा है कि वे अपने घरों, दुकानों और अन्य सुरक्षित स्थानों पर गौरैयों के लिए छोटे घोंसले लगाएं। साथ ही गर्मियों में पानी और दाना उपलब्ध कराने की सलाह दी जा रही है।
कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में लोग इस पहल से जुड़ते हैं तो गौरैयों के लिए शहर में अधिक सुरक्षित आवास तैयार किए जा सकते हैं।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश
गौरैया संरक्षण की इस पहल के जरिए लोगों को जैव विविधता और पक्षियों के संरक्षण के प्रति जागरूक करने का भी प्रयास किया जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी क्षेत्र में पक्षियों की मौजूदगी स्थानीय पर्यावरण और जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण होती है। इसलिए छोटे पक्षियों के लिए आवास और भोजन के स्रोत बनाए रखना पर्यावरण संरक्षण का हिस्सा है।
आगे भी जारी रहेगा प्रयास
NGO की योजना इस अभियान को और क्षेत्रों तक पहुंचाने की है। अधिक से अधिक घोंसले लगाने के साथ लोगों को गौरैयों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के बारे में जागरूक किया जाएगा।
कुल मिलाकर, सिरसा में एक NGO ने घटती गौरैया आबादी को बचाने के लिए सुरक्षित घोंसले और आश्रय स्थल तैयार करने की पहल की है। अभियान का उद्देश्य गौरैयों को रहने और प्रजनन के लिए सुरक्षित जगह उपलब्ध कराना और स्थानीय लोगों को पक्षी संरक्षण से जोड़ना है।
