22 अगस्त 2026 दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव में इस बार प्रचार का तरीका बदलने वाला है। प्रिंटेड पोस्टर और पर्चों पर रोक के चलते उम्मीदवार सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का सहारा लेकर प्रचार करेंगे। दिल्ली विश्वविद्यालय ने 2026-27 के DUSU और कॉलेज छात्रसंघ चुनावों के लिए नई आचार संहिता जारी की है।
₹5,000 की खर्च सीमा
विश्वविद्यालय ने प्रत्येक उम्मीदवार के चुनाव प्रचार के खर्च की सीमा ₹5,000 तय की है। उम्मीदवारों को उपलब्ध सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए प्रचार करने की अनुमति होगी।
DU ने चुनाव से संबंधित सामग्री के लिए अपनी वेबसाइट पर भी एक विशेष स्थान बनाया है। उम्मीदवार अधिकतम 10 मिनट का चुनावी भाषण वीडियो मुख्य चुनाव अधिकारी को 12 सितंबर को दोपहर 2 बजे तक जमा कर सकते हैं। मंजूरी के बाद इन वीडियो को विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा।
प्रिंटेड पोस्टर और पर्चों पर रोक
आचार संहिता के तहत उम्मीदवार प्रिंटेड पोस्टर, पर्चे या अन्य किसी भी प्रिंटेड सामग्री का इस्तेमाल प्रचार के लिए नहीं कर सकेंगे।
हालांकि, उम्मीदवार हाथ से बनाए गए पोस्टर लगा सकते हैं, लेकिन इन्हें केवल विश्वविद्यालय या संबंधित कॉलेज द्वारा पहले से निर्धारित स्थानों पर ही लगाया जा सकेगा।
रात में प्रचार पर भी रोक
प्रचार का समय भी निर्धारित किया गया है। उम्मीदवार सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक ही प्रचार कर सकेंगे। एक उम्मीदवार के साथ प्रचार के दौरान अधिकतम चार bona fide छात्र रह सकेंगे।
लाउडस्पीकर और वाहनों का इस्तेमाल प्रतिबंधित
विश्वविद्यालय ने प्रचार के दौरान लाउडस्पीकर, वाहनों और जानवरों के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई है। इसके अलावा प्रचार में mascots, characters और costumes का इस्तेमाल भी प्रतिबंधित रहेगा।
ऑनलाइन शिकायत पोर्टल भी शुरू
DU ने चुनाव के दौरान दीवारों या अन्य स्थानों पर अवैध पोस्टर लगाने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी शिकायतों के लिए ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया है।
शिकायत के साथ घटना की जानकारी, संबंधित छात्रों का विवरण और geotagged फोटो या वीडियो सबूत के तौर पर जमा किए जा सकेंगे। विश्वविद्यालय ने शिकायतकर्ताओं की पहचान गोपनीय रखने का आश्वासन दिया है।
सोशल मीडिया बनेगा प्रचार का मुख्य माध्यम
पोस्टर और पर्चों पर प्रतिबंध के बाद इस साल DUSU चुनाव में सोशल मीडिया प्रचार की भूमिका काफी बढ़ने की संभावना है। उम्मीदवार डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए छात्रों तक अपनी नीतियां और चुनावी संदेश पहुंचाएंगे।
कुल मिलाकर, दिल्ली विश्वविद्यालय के इस फैसले से DUSU चुनाव प्रचार का पारंपरिक पोस्टर-पर्चा मॉडल काफी हद तक बदल जाएगा और सोशल मीडिया व ऑनलाइन प्रचार इस चुनाव में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
