22 अगस्त 2026 राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के बिजवासन रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास से जुड़ी करीब 95 एकड़ जमीन के संबंध में दायर याचिका का निपटारा कर दिया है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि जमीन की कानूनी स्थिति से जुड़ा मुद्दा मार्च 2026 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले ही तय हो चुका है।
क्या था मामला?
याचिका में सवाल उठाया गया था कि क्या करीब 95 एकड़ जमीन को ‘डीम्ड फॉरेस्ट’ (माना गया वन) माना जा सकता है और क्या इस जमीन पर काम शुरू करने से पहले केंद्र सरकार की मंजूरी जरूरी है।
NGT ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च 2026 के अपने फैसले में इसी परियोजना से जुड़ी बड़ी जमीन के कानूनी दर्जे पर फैसला दे दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, जिस जमीन को आधिकारिक रिकॉर्ड में वन के रूप में दर्ज या घोषित नहीं किया गया था और जो संबंधित मास्टर प्लान लागू होने के समय ‘डीम्ड फॉरेस्ट’ की शर्तें पूरी नहीं करती थी, उसे बाद में केवल पेड़ों या वनस्पति के बढ़ने के कारण वन या ‘डीम्ड फॉरेस्ट’ घोषित नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने यह भी कहा था कि जमीन की वन संबंधी स्थिति निर्धारित करने के लिए मास्टर प्लान लागू होने की तारीख महत्वपूर्ण है।
NGT ने याचिका क्यों निपटाई?
NGT ने कहा कि याचिका में उठाया गया मुद्दा सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पूरी तरह कवर होता है। इसलिए इस मामले में अलग से हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं है और याचिका का निपटारा कर दिया गया।
पेड़ों और पर्यावरण को लेकर भी निर्देश
हालांकि, NGT ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों का पालन इस 95 एकड़ जमीन पर भी किया जाएगा।
इनमें:
- स्थानीय और देशी प्रजातियों के पेड़ों को अधिकतम संभव संख्या में ट्रांसप्लांट करने का प्रयास।
- मौजूदा पेड़ों, खासकर देशी प्रजातियों के संरक्षण और सुरक्षा पर ध्यान।
- निर्माण कार्य शुरू होने से पहले नियमों के अनुसार क्षतिपूरक वनीकरण (compensatory afforestation) करना।
- सक्षम अधिकारियों से जरूरी अनुमति और पर्यावरणीय नियमों का पालन सुनिश्चित करना।
बिजवासन स्टेशन क्यों महत्वपूर्ण है?
बिजवासन रेलवे स्टेशन को दिल्ली के महत्वपूर्ण परिवहन ढांचे के रूप में विकसित करने की योजना है। प्रस्तावित पुनर्विकास का उद्देश्य इसे आधुनिक और बड़े यात्री टर्मिनल के रूप में विकसित करना है, जो दिल्ली के व्यापक परिवहन और शहरी बुनियादी ढांचे का हिस्सा होगा।
कुल मिलाकर, NGT ने बिजवासन रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास से जुड़ी 95 एकड़ जमीन को ‘डीम्ड फॉरेस्ट’ घोषित करने की मांग वाली याचिका का निपटारा कर दिया है। हालांकि परियोजना आगे बढ़ सकती है, लेकिन पेड़ों के संरक्षण, ट्रांसप्लांटेशन और क्षतिपूरक वनीकरण से जुड़े पर्यावरणीय निर्देशों का पालन करना जरूरी होगा।
