27 जून 2026 : दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कथित 600 करोड़ रुपये के हेल्थ प्रोक्योरमेंट स्कैम मामले में जांच एजेंसियों ने बड़ा खुलासा किया है। दर्ज FIR के अनुसार, सरकारी अस्पतालों के लिए मेडिकल सप्लाई और उपकरणों की खरीद में कथित तौर पर भारी कीमत बढ़ोतरी की गई। जांच में कुछ सामानों की कीमतों में 200 प्रतिशत से 500 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी का आरोप लगाया गया है।
मामले की जांच दिल्ली की एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) और अन्य एजेंसियां कर रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर मनी लॉन्ड्रिंग जांच शुरू की है।
मेडिकल उपकरणों की खरीद में कथित गड़बड़ी
FIR के अनुसार, सरकारी अस्पतालों के लिए खरीदे गए कुछ मेडिकल उपकरणों और सामानों में बाजार कीमत से काफी अधिक भुगतान किए जाने का आरोप है। इसमें पोर्टेबल एक्स-रे मशीन, C-Arm रेडियोलॉजी उपकरण, एनेस्थीसिया वर्कस्टेशन, ORS और अन्य मेडिकल सप्लाई शामिल हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, कुछ मामलों में टेंडर प्रक्रिया, सप्लायर चयन और कीमत निर्धारण को लेकर सवाल उठाए गए हैं। अधिकारियों और संबंधित पक्षों की भूमिका की जांच की जा रही है।
कीमतों में भारी अंतर का आरोप
FIR में आरोप लगाया गया है कि कुछ मेडिकल सामानों की खरीद में वास्तविक बाजार कीमत और भुगतान की गई राशि के बीच बड़ा अंतर था। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ वस्तुओं में कथित रूप से 200% से 500% तक की कीमत वृद्धि दिखाई गई।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि खरीद प्रक्रिया में किन स्तरों पर अनियमितताएं हुईं और क्या किसी तरह की मिलीभगत हुई थी।
टेंडर प्रक्रिया पर उठे सवाल
मामले में आरोप लगाया गया है कि कुछ टेंडर शर्तों और तकनीकी मानकों को इस तरह तैयार किया गया जिससे सीमित कंपनियों को फायदा मिल सके। हालांकि, पूरे मामले में जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
जांच एजेंसियों की कार्रवाई
इस मामले में कुछ लोगों के नाम सामने आए हैं और पूछताछ व जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। ED ने भी संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच शुरू की है।
स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि सरकारी अस्पतालों के लिए खरीदी जाने वाली दवाओं और उपकरणों का सीधा संबंध आम जनता की सुविधाओं से होता है।
आगे क्या?
600 करोड़ रुपये के इस कथित घोटाले में जांच आगे बढ़ने के साथ और जानकारी सामने आने की संभावना है। एजेंसियां खरीद रिकॉर्ड, भुगतान विवरण और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच कर रही हैं।
यह मामला सरकारी खरीद प्रणाली में पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी चर्चा का विषय बन गया है।
