15 अप्रैल 2026 : नशे की समस्या को लेकर एक चौंकाने वाली तुलना सामने आई है, जिसमें पंजाब में जहां ड्रग ओवरडोज से सैकड़ों मौतें दर्ज की गई हैं, वहीं कनाडा में पिछले 10 वर्षों में यह आंकड़ा 18,000 तक पहुंच चुका है। इस तुलना ने वैश्विक स्तर पर नशे की बढ़ती समस्या और इसके गंभीर प्रभावों को उजागर किया है।
पंजाब लंबे समय से नशे की समस्या से जूझ रहा है। यहां युवाओं में ड्रग्स के बढ़ते चलन ने सामाजिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर गंभीर चिंताएं पैदा की हैं। हालांकि हाल के आंकड़ों के अनुसार ओवरडोज से होने वाली मौतों की संख्या सैकड़ों में बताई जा रही है, जो अपने आप में एक गंभीर संकेत है।
दूसरी ओर कनाडा जैसे विकसित देश में भी नशे की समस्या ने विकराल रूप ले लिया है। वहां पिछले एक दशक में 18,000 से अधिक लोगों की मौत ड्रग ओवरडोज के कारण हो चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या खासकर ओपिओइड जैसे नशीले पदार्थों के बढ़ते इस्तेमाल से जुड़ी हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार दोनों जगहों की परिस्थितियां अलग होने के बावजूद एक समान चिंता यह है कि नशा तेजी से समाज के विभिन्न वर्गों में फैल रहा है। पंजाब में जहां बेरोजगारी, सीमावर्ती क्षेत्र और तस्करी जैसे कारण बताए जाते हैं, वहीं कनाडा में मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, दवाओं का दुरुपयोग और सामाजिक दबाव जैसे कारण प्रमुख माने जाते हैं।
सरकारों द्वारा इस समस्या से निपटने के लिए विभिन्न कदम उठाए जा रहे हैं। पंजाब में नशा विरोधी अभियान, जागरूकता कार्यक्रम और पुलिस कार्रवाई पर जोर दिया जा रहा है। वहीं कनाडा में हानि कम करने (harm reduction) की रणनीतियों, उपचार केंद्रों और सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के जरिए इस संकट से निपटने की कोशिश की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कानून व्यवस्था के जरिए इस समस्या को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता, बल्कि इसके लिए सामाजिक, स्वास्थ्य और मनोवैज्ञानिक स्तर पर भी व्यापक प्रयासों की जरूरत है।
इस तुलना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नशे की समस्या किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक चुनौती बन चुकी है, जिसके लिए समन्वित और दीर्घकालिक रणनीति की आवश्यकता है।
कुल मिलाकर पंजाब और कनाडा के आंकड़े यह दिखाते हैं कि नशे के खिलाफ लड़ाई अभी लंबी है और इसके लिए सरकारों, समाज और व्यक्तियों को मिलकर काम करने की जरूरत है।
