09 मार्च 2026 : “हमें केवल आश्वासन या अस्थायी उपाय नहीं चाहिए। मेलघाट में कुपोषण खत्म करने के लिए विशेष पैकेज, विशेषज्ञ डॉक्टरों की स्थायी नियुक्ति और वन विभाग के कानूनों की कठोर शर्तों में ढील देकर सड़क व बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए ठोस सरकारी निर्णय होने तक हम चिखलदरा से नहीं हटेंगे,” ऐसा कड़ा इशारा पूर्व राज्यमंत्री बच्चू कडू ने सरकार को दिया है।
पूर्व राज्यमंत्री बच्चू कडू के नेतृत्व में निकली ‘मेलघाट संघर्ष महापदयात्रा’ सोमवार को चिखलदरा पहुंचने वाली है। यहां प्रशासनिक ढिलाई के विरोध में उग्र आंदोलन किया जाएगा। काटकुंभ से शुरू हुई यह पदयात्रा बामादेही, डोमा और काजलडोह जैसे दुर्गम क्षेत्रों से गुजरते हुए रविवार को सलोना में पहुंची।
चिखलदरा बना छावनी जैसा
आंदोलन के मद्देनज़र अमरावती ग्रामीण पुलिस ने चिखलदरा शहर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है। तहसील कार्यालय को छावनी में तब्दील कर दिया गया है और संवेदनशील मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई है। आदिवासी युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की मांग को लेकर हजारों आंदोलनकारी चिखलदरा पहुंचने वाले हैं। अब राज्य सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है, इस पर सबकी नजर है।
‘लोहारडोंगरी’ के खिलाफ आंदोलन
मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने, बाघों के हमलों में हो रही मौतों और ताडोबा के वन्यजीव कॉरिडोर को खतरा पैदा करने वाले प्रस्तावित लोहारडोंगरी खनन प्रोजेक्ट के विरोध में इको-प्रो संस्था के अध्यक्ष बंडू धोतरे ने जिलाधिकारी कार्यालय के सामने अनशन शुरू किया है। रविवार को चौथे दिन सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए आंदोलन स्थल पर लोटांगन आंदोलन भी किया गया।
ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व से उमरेड-करहांडला और नवेगांव-नागझिरा तक फैले संवेदनशील टाइगर कॉरिडोर में प्रस्तावित लोहारडोंगरी लौह अयस्क खदान को रद्द करने की मांग को लेकर “सेव लोहारडोंगरी, सेव ताडोबा” नाम से ऑनलाइन अभियान भी चलाया जा रहा है। इस अभियान को अब तक 25 हजार से अधिक लोगों का समर्थन मिल चुका है। बहार नेचर फाउंडेशन (वर्धा), शिव छत्रपति प्रचारक मंडल (चंद्रपुर), आजाद गार्डन गुड मॉर्निंग ग्रुप (चंद्रपुर) और साइकिल डीलर्स एसोसिएशन (चंद्रपुर) ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया है।
