• Sun. Mar 1st, 2026

पीएसपीसीएल की संपत्तियों की बिक्री पर हाईकोर्ट की रोक जारी, जानिए पूरा मामला

पंजाब 28 फरवरी 2026 : पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) की संपत्तियों के हस्तांतरण और संभावित बिक्री पर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने लगाई गई अंतरिम रोक को फिलहाल बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया है कि 13 मार्च को अगली सुनवाई तक कोई भी संपत्ति नहीं बेची जाएगी। अदालत ने कहा कि यदि पीएसपीसीएल पर 2500 करोड़ रुपए से अधिक के वित्तीय बोझ का दावा सही पाया जाता है, तो यह मामला निश्चित रूप से जनहित के दायरे में आएगा।

मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अगुवाई वाली बेंच के समक्ष राज्य सरकार ने रोक हटाने की मांग करते हुए दलील दी कि संपत्तियों की बिक्री नहीं, बल्कि विकास के उद्देश्य से उनका हस्तांतरण किया जा रहा है। एडवोकेट जनरल ने अदालत को बताया कि यह फैसला लगभग 30 साल पुरानी नीति के तहत लिया गया है, जिसे कभी चुनौती नहीं दी गई। उन्होंने दावा किया कि पीएसपीसीएल घाटे में नहीं बल्कि मुनाफे में है और राज्य सरकार आवासीय एवं व्यावसायिक विकास के माध्यम से राज्य के संसाधनों का बेहतर उपयोग करना चाहती है। हालांकि याचिकाकर्ता ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि पंजाब सरकार के विभिन्न विभागों पर पीएसपीसीएल के लगभग 2582.24 करोड़ रुपए बकाया हैं, जिसके कारण कंपनी वित्तीय दबाव में आकर अपनी अचल संपत्तियां हस्तांतरित करने के लिए मजबूर हो रही है।

वित्तीय बोझ होने का दावा सही मिला तो जनहित के दायरे में आएगा मामला
बेंच ने प्रारंभिक आपत्तियों पर फिलहाल राहत देते हुए कहा कि यदि याचिकाकर्ताओं का यह दावा सही है कि कंपनी भारी वित्तीय बोझ के कारण संपत्ति हस्तांतरण के लिए मजबूर हो रही है, तो यह मुद्दा निश्चित रूप से जनहित के दायरे में आएगा। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिका स्वीकार करने का प्रश्न खुला रहेगा और राज्य सरकार अगली सुनवाई में इस पर विस्तृत बहस कर सकती है। अदालत ने राज्य को निर्देश दिया कि वह पैरा-वाइज जवाब और रोक हटाने संबंधी आवेदन आवश्यक दस्तावेजों एवं हलफनामे सहित दाखिल करे।पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) की संपत्तियों के हस्तांतरण और संभावित बिक्री पर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने लगाई गई अंतरिम रोक को फिलहाल बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया है कि 13 मार्च को अगली सुनवाई तक कोई भी संपत्ति नहीं बेची जाएगी। अदालत ने कहा कि यदि पीएसपीसीएल पर 2500 करोड़ रुपए से अधिक के वित्तीय बोझ का दावा सही पाया जाता है, तो यह मामला निश्चित रूप से जनहित के दायरे में आएगा।

मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अगुवाई वाली बेंच के समक्ष राज्य सरकार ने रोक हटाने की मांग करते हुए दलील दी कि संपत्तियों की बिक्री नहीं, बल्कि विकास के उद्देश्य से उनका हस्तांतरण किया जा रहा है। एडवोकेट जनरल ने अदालत को बताया कि यह फैसला लगभग 30 साल पुरानी नीति के तहत लिया गया है, जिसे कभी चुनौती नहीं दी गई। उन्होंने दावा किया कि पीएसपीसीएल घाटे में नहीं बल्कि मुनाफे में है और राज्य सरकार आवासीय एवं व्यावसायिक विकास के माध्यम से राज्य के संसाधनों का बेहतर उपयोग करना चाहती है। हालांकि याचिकाकर्ता ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि पंजाब सरकार के विभिन्न विभागों पर पीएसपीसीएल के लगभग 2582.24 करोड़ रुपए बकाया हैं, जिसके कारण कंपनी वित्तीय दबाव में आकर अपनी अचल संपत्तियां हस्तांतरित करने के लिए मजबूर हो रही है।

वित्तीय बोझ होने का दावा सही मिला तो जनहित के दायरे में आएगा मामला
बेंच ने प्रारंभिक आपत्तियों पर फिलहाल राहत देते हुए कहा कि यदि याचिकाकर्ताओं का यह दावा सही है कि कंपनी भारी वित्तीय बोझ के कारण संपत्ति हस्तांतरण के लिए मजबूर हो रही है, तो यह मुद्दा निश्चित रूप से जनहित के दायरे में आएगा। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिका स्वीकार करने का प्रश्न खुला रहेगा और राज्य सरकार अगली सुनवाई में इस पर विस्तृत बहस कर सकती है। अदालत ने राज्य को निर्देश दिया कि वह पैरा-वाइज जवाब और रोक हटाने संबंधी आवेदन आवश्यक दस्तावेजों एवं हलफनामे सहित दाखिल करे।पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) की संपत्तियों के हस्तांतरण और संभावित बिक्री पर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने लगाई गई अंतरिम रोक को फिलहाल बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया है कि 13 मार्च को अगली सुनवाई तक कोई भी संपत्ति नहीं बेची जाएगी। अदालत ने कहा कि यदि पीएसपीसीएल पर 2500 करोड़ रुपए से अधिक के वित्तीय बोझ का दावा सही पाया जाता है, तो यह मामला निश्चित रूप से जनहित के दायरे में आएगा।

मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अगुवाई वाली बेंच के समक्ष राज्य सरकार ने रोक हटाने की मांग करते हुए दलील दी कि संपत्तियों की बिक्री नहीं, बल्कि विकास के उद्देश्य से उनका हस्तांतरण किया जा रहा है। एडवोकेट जनरल ने अदालत को बताया कि यह फैसला लगभग 30 साल पुरानी नीति के तहत लिया गया है, जिसे कभी चुनौती नहीं दी गई। उन्होंने दावा किया कि पीएसपीसीएल घाटे में नहीं बल्कि मुनाफे में है और राज्य सरकार आवासीय एवं व्यावसायिक विकास के माध्यम से राज्य के संसाधनों का बेहतर उपयोग करना चाहती है। हालांकि याचिकाकर्ता ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि पंजाब सरकार के विभिन्न विभागों पर पीएसपीसीएल के लगभग 2582.24 करोड़ रुपए बकाया हैं, जिसके कारण कंपनी वित्तीय दबाव में आकर अपनी अचल संपत्तियां हस्तांतरित करने के लिए मजबूर हो रही है।

वित्तीय बोझ होने का दावा सही मिला तो जनहित के दायरे में आएगा मामला
बेंच ने प्रारंभिक आपत्तियों पर फिलहाल राहत देते हुए कहा कि यदि याचिकाकर्ताओं का यह दावा सही है कि कंपनी भारी वित्तीय बोझ के कारण संपत्ति हस्तांतरण के लिए मजबूर हो रही है, तो यह मुद्दा निश्चित रूप से जनहित के दायरे में आएगा। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिका स्वीकार करने का प्रश्न खुला रहेगा और राज्य सरकार अगली सुनवाई में इस पर विस्तृत बहस कर सकती है। अदालत ने राज्य को निर्देश दिया कि वह पैरा-वाइज जवाब और रोक हटाने संबंधी आवेदन आवश्यक दस्तावेजों एवं हलफनामे सहित दाखिल करे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *