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कपास उत्पादन पर संकट के बादल, कम पैदावार और बढ़ती लागत से हरियाणा के किसान परेशान

 27 जून 2026 : हरियाणा के खेतों में कभी किसानों की आर्थिक मजबूती का प्रतीक माना जाने वाला कपास यानी ‘सफेद सोना’ अब अपनी चमक खोता नजर आ रहा है। कपास की खेती करने वाले किसान कम उत्पादन, बढ़ती लागत और मौसम की अनिश्चितताओं के कारण परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

हरियाणा के कई कपास उत्पादक क्षेत्रों में किसानों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में कपास की खेती पहले जैसी लाभकारी नहीं रही। खेती में बढ़ता खर्च, कीटों का प्रभाव और बदलते मौसम ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

कपास उत्पादन में गिरावट की चिंता

कपास हरियाणा की प्रमुख नकदी फसलों में से एक रही है। राज्य के कई जिलों में किसान लंबे समय से कपास की खेती करते आए हैं। लेकिन हाल के वर्षों में उत्पादन में गिरावट और फसल से मिलने वाले लाभ में कमी ने किसानों को चिंता में डाल दिया है।

किसानों के अनुसार, बीज, खाद, कीटनाशक और मजदूरी की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि बाजार में कपास की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहता है। इससे खेती का संतुलन बिगड़ रहा है।

मौसम और कीटों का असर

कपास की फसल मौसम पर काफी निर्भर करती है। अत्यधिक गर्मी, कम बारिश या अनियमित मौसम का सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है।

इसके अलावा कीटों के हमले भी कपास किसानों के लिए बड़ी समस्या बने हुए हैं। फसल को बचाने के लिए किसानों को अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है, जिससे मुनाफा कम हो जाता है।

किसानों की बढ़ती मुश्किलें

कई किसानों का कहना है कि कपास की खेती में मेहनत ज्यादा है लेकिन अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा। यही कारण है कि कुछ किसान दूसरी फसलों की ओर रुख करने पर विचार कर रहे हैं।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि कपास की खेती को मजबूत बनाने के लिए बेहतर बीज, आधुनिक तकनीक, समय पर सलाह और उचित बाजार व्यवस्था जरूरी है।

सरकार से उम्मीदें

कपास किसानों को उम्मीद है कि सरकार फसल उत्पादन बढ़ाने, लागत कम करने और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी कदम उठाएगी।

किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य, तकनीकी सहायता और फसल सुरक्षा योजनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

भविष्य की चुनौती

हरियाणा में कपास को फिर से मजबूत फसल बनाने के लिए किसानों, वैज्ञानिकों और सरकार के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत है। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो ‘सफेद सोना’ की पहचान रखने वाली यह फसल और कमजोर हो सकती है।

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