29 अक्तूबर 2026: उत्तर प्रदेश विधान परिषद की वाराणसी स्नातक सीट के चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा ने बीजेपी उम्मीदवार केदारनाथ सिंह पर मजबूत बढ़त बना ली है। मतगणना के दौरान सपा कार्यकर्ताओं में उत्साह देखने को मिला और कई जगह ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाने की खबरें सामने आईं। बीजेपी प्रत्याशी केदारनाथ सिंह ने भी जनादेश को स्वीकार करते हुए हार मानने का संदेश दिया है।
आशुतोष सिन्हा को मिली बड़ी बढ़त
मतगणना के नवीनतम उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, आशुतोष सिन्हा को 50,462 वोट मिले, जबकि बीजेपी के केदारनाथ सिंह को 33,674 वोट प्राप्त हुए। इस तरह सपा प्रत्याशी 16,788 वोटों से आगे रहे। मतगणना के दौरान दूसरे वरीयता वाले मतों की गिनती भी चर्चा में रही।
बीजेपी प्रत्याशी ने स्वीकार किया जनादेश
बीजेपी उम्मीदवार केदारनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर संदेश साझा करते हुए जनादेश को विनम्रता से स्वीकार करने की बात कही। उनके इस संदेश के बाद चुनावी मुकाबले को लेकर राजनीतिक हलचल और तेज हो गई। हालांकि, अंतिम परिणाम की औपचारिक घोषणा और प्रमाणपत्र जारी होने की स्थिति की पुष्टि संबंधित चुनाव अधिकारियों से की जानी चाहिए।
मतगणना को लेकर दोनों दलों में तनाव
वाराणसी स्नातक सीट की मतगणना लंबे समय तक जारी रहने के कारण सपा और बीजेपी के कार्यकर्ता मतगणना केंद्र के आसपास मौजूद रहे। बीजेपी की ओर से मतगणना प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे, जबकि सपा नेतृत्व ने अपने कार्यकर्ताओं से प्रमाणपत्र मिलने तक केंद्र पर बने रहने की अपील की। इन आरोपों और दावों का अंतिम निष्कर्ष संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक जानकारी से ही स्पष्ट होगा।
वाराणसी की दोनों MLC सीटों पर सपा को सफलता
वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सपा के लाल बिहारी यादव ने जीत दर्ज की थी। वहीं, स्नातक सीट पर आशुतोष सिन्हा की बढ़त ने पार्टी को एक और सफलता की ओर पहुंचाया। वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र भी है, इसलिए यहां का विधान परिषद चुनाव राजनीतिक रूप से चर्चा में रहा। हालांकि, शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाता सीमित पंजीकृत समूह होते हैं, इसलिए इनके नतीजों को पूरे क्षेत्र के मतदाताओं की राय का सीधा संकेत नहीं माना जा सकता।
अंतिम नतीजे पर आधिकारिक पुष्टि अहम
वाराणसी स्नातक सीट की मतगणना के दौरान सपा प्रत्याशी की बढ़त और बीजेपी उम्मीदवार के संदेश ने मुकाबले को सुर्खियों में ला दिया। अंतिम चुनावी स्थिति के लिए निर्वाचन अधिकारियों की औपचारिक घोषणा और जीत का प्रमाणपत्र महत्वपूर्ण रहेगा।
