1 अक्टूबर 2026 पंजाब के मुक्तसर साहिब जिले के मालोट विधानसभा क्षेत्र में फसल कटाई के मौसम के दौरान खेतों में आग की घटनाओं से तेजी से निपटने के लिए एक नई पहल शुरू की गई है। मालोट विधानसभा क्षेत्र की 14 ग्राम पंचायतों को ट्रैक्टर से चलने वाले पानी के टैंकर और मिनी फायर टेंडर उपलब्ध कराए गए हैं। इन उपकरणों में पानी के पंप और स्प्रे सिस्टम लगाए गए हैं, ताकि गांवों में आग लगने की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
इस पहल का उद्देश्य खास तौर पर उन गांवों में आग बुझाने की सुविधा उपलब्ध कराना है, जहां नियमित फायर टेंडर को पहुंचने में अधिक समय लग सकता है। प्रत्येक ग्राम पंचायत के लिए 5 लाख रुपये की राशि जारी की गई है। यह राशि सामाजिक सुरक्षा विभाग की ओर से उपलब्ध कराई गई है।
गांव में ही उपलब्ध होगी आग बुझाने की सुविधा
ट्रैक्टर से चलने वाले इन मिनी फायर टेंडरों को इस तरह तैयार किया गया है कि आग लगने की सूचना मिलने पर ग्रामीण स्तर पर ही शुरुआती कार्रवाई की जा सके। इससे छोटी आग को समय रहते नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है और उसके बड़े क्षेत्र में फैलने की संभावना कम की जा सकती है।
सामाजिक सुरक्षा मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि इन मिनी फायर टेंडरों का इस्तेमाल केवल उन गांवों तक सीमित नहीं रहेगा, जिन्हें ये उपकरण मिले हैं। जरूरत पड़ने पर इन्हें आसपास के गांवों में भी भेजा जा सकेगा।
आसपास के गांवों को भी मिलेगा फायदा
मंत्री के अनुसार, यदि किसी पड़ोसी गांव में आग लगती है और वहां तत्काल फायर टेंडर उपलब्ध नहीं है, तो इन ट्रैक्टर चालित टैंकरों को वहां भी भेजा जा सकता है। इससे ग्रामीण इलाकों में आग बुझाने के लिए स्थानीय स्तर पर एक अतिरिक्त व्यवस्था उपलब्ध होगी।
उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य गांव के भीतर ही बुनियादी अग्निशमन सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि ग्रामीणों को हर छोटी आग के लिए दूर स्थित शहर से फायर टेंडर आने का इंतजार न करना पड़े।
फसल कटाई के मौसम में बढ़ जाती है आग की चिंता
फसल कटाई के दौरान खेतों और फसल अवशेषों में आग लगने की घटनाएं किसानों के लिए चिंता का विषय रहती हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर पानी और स्प्रे सिस्टम से लैस वाहन उपलब्ध होने से आग पर शुरुआती स्तर पर काबू पाने में मदद मिल सकती है।
मालोट क्षेत्र में पहले भी खेतों में आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। पिछले साल सोथा और चक दुहेवाला गांवों में लगी आकस्मिक आग से गेहूं की फसल को बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचा था। इसके बाद प्रभावित किसानों की सहायता के लिए डॉ. बलजीत कौर ने अपने एक महीने का वेतन दान किया था। बाद में उन्होंने स्थानीय लोगों और एनआरआई के सहयोग से प्रभावित 20 किसानों को 5-5 लाख रुपये और 12-12 बोरी गेहूं उपलब्ध कराया था।
नियमित फायर ब्रिगेड का भी कम होगा दबाव
स्थानीय स्तर पर मिनी फायर टेंडर उपलब्ध होने से नियमित फायर ब्रिगेड पर भी दबाव कम हो सकता है। खासकर ऐसी स्थिति में जब एक ही समय में अलग-अलग गांवों से आग की कई घटनाओं की सूचना मिले, तब स्थानीय संसाधनों की मदद से शुरुआती कार्रवाई की जा सकती है।
इससे नियमित फायर टेंडरों को अधिक गंभीर घटनाओं पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिल सकता है। साथ ही ग्रामीणों को आग की स्थिति में तत्काल सहायता मिलने की संभावना बढ़ेगी।
पीने के पानी के लिए भी हो सकता है इस्तेमाल
इन ट्रैक्टर चालित पानी के टैंकरों का इस्तेमाल केवल आग बुझाने के लिए ही नहीं किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर इनका उपयोग पीने के पानी की आपूर्ति के लिए भी किया जा सकता है। इसके अलावा आवश्यकता के अनुसार आसपास के गांवों में भी इन संसाधनों को इस्तेमाल में लाया जा सकेगा।
इस तरह ग्राम पंचायतों को उपलब्ध कराए गए ये उपकरण फसल कटाई के मौसम में आग से बचाव के साथ-साथ अन्य जरूरी परिस्थितियों में भी उपयोगी साबित हो सकते हैं।
ग्रामीणों की भागीदारी पर भी जोर
सामाजिक सुरक्षा मंत्री ने कहा कि स्थानीय स्तर पर इस तरह के उपकरण उपलब्ध होने से लोगों और ग्राम पंचायतों की आग से होने वाले नुकसान को रोकने में भागीदारी बढ़ सकती है। ग्रामीण यदि समय रहते आग की सूचना दें और शुरुआती स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करें, तो नुकसान को सीमित करने में मदद मिल सकती है।
कुल मिलाकर, मालोट विधानसभा क्षेत्र की 14 ग्राम पंचायतों को ट्रैक्टर चालित मिनी फायर टेंडर उपलब्ध कराए गए हैं। प्रत्येक पंचायत के लिए 5 लाख रुपये की राशि जारी की गई है। इन उपकरणों का उद्देश्य खेतों और गांवों में आग लगने की स्थिति में तेजी से सहायता पहुंचाना है। जरूरत पड़ने पर इन्हें पड़ोसी गांवों में भी भेजा जाएगा।
