7 अगस्त, 2026 : सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने और जांच कराने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने याचिका को “सस्ती लोकप्रियता (cheap publicity)” पाने का प्रयास बताते हुए कड़ी टिप्पणी की।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायाधीशों के खिलाफ कार्रवाई की एक निर्धारित संवैधानिक और वैधानिक प्रक्रिया होती है और ऐसे मामलों में बिना ठोस आधार के आपराधिक जांच की मांग करना उचित नहीं है।
अदालत की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संस्थागत गरिमा को ध्यान में रखते हुए ऐसे मामलों में जिम्मेदाराना दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। अदालत ने याचिका में लगाए गए आरोपों को पर्याप्त आधारहीन बताया।
FIR और जांच की मांग अस्वीकार
याचिकाकर्ता ने जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज कर स्वतंत्र जांच कराने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने यह मांग स्वीकार करने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।
न्यायपालिका की गरिमा पर जोर
अदालत ने कहा कि न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायतों के निपटारे के लिए स्थापित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए और न्यायिक संस्थानों को अनावश्यक रूप से विवादों में घसीटना उचित नहीं है।
