14 मई 2026 : शिवसेना ने महाराष्ट्र में दुकानों पर लगे अंग्रेजी और उर्दू नामफलक को लेकर कड़ा रुख अपनाया है।
जानकारी के अनुसार पार्टी नेताओं ने कहा कि दुकानों और प्रतिष्ठानों के बोर्डों पर मराठी भाषा को प्रमुखता मिलनी चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर शिवसेना कार्यकर्ताओं ने कई स्थानों पर आंदोलनात्मक रुख दिखाया और दुकानदारों को एक महीने की समयसीमा देने की बात कही।
पार्टी की ओर से चेतावनी दी गई कि निर्धारित समय के भीतर स्थानीय भाषा को प्रमुखता नहीं दी गई तो वे “अपनी पद्धति से धड़ा सिखाएंगे”। इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है।
भाषा और सांस्कृतिक पहचान को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में पहले भी कई बार इस तरह के मुद्दे उठते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने की मांग और व्यावसायिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी होता है।
स्थानीय व्यापारियों के बीच इस मुद्दे को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग स्थानीय भाषा को प्राथमिकता देने के पक्ष में हैं, जबकि कुछ का कहना है कि बहुभाषी बोर्ड व्यापारिक दृष्टि से जरूरी होते हैं।
कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए है और किसी भी प्रकार की जबरदस्ती या तनावपूर्ण स्थिति से बचने की अपील की गई है।
सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस जारी है और लोग भाषा, पहचान तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अपनी-अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं।
कुल मिलाकर दुकानों के नामफलक को लेकर शिवसेना के आक्रामक रुख ने महाराष्ट्र में भाषा और सांस्कृतिक पहचान की बहस को फिर से केंद्र में ला दिया है।
