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राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा फैसला संभव, आज नियुक्त हो सकता है पहला पूर्णकालिक CEO

2 सितंबर 2026  श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के लिए आज का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। अयोध्या के राम मंदिर के प्रशासन और प्रबंधन को और अधिक व्यवस्थित करने के लिए ट्रस्ट अपने पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति कर सकता है। CEO के चयन की लंबी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सर्च कमेटी ने तीन नामों का पैनल ट्रस्ट को सौंप दिया है। अब अंतिम फैसला ट्रस्ट की बैठक में होना है।

5,585 आवेदनों से तीन नामों तक पहुंची रेस

राम मंदिर ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति के लिए बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए थे। रिपोर्ट के अनुसार, इस पद के लिए कुल 5,585 आवेदन आए थे। आवेदकों की योग्यता, अनुभव और अन्य मानकों के आधार पर कई चरणों में स्क्रीनिंग की गई।

चयन प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों के अनुभव, प्रशासनिक क्षमता, नेतृत्व कौशल, विजन और मंदिर से जुड़े बड़े स्तर के प्रबंधन को संभालने की क्षमता का आकलन किया गया। कई चरणों के बाद उम्मीदवारों की संख्या घटाकर अंतिम स्तर तक पहुंचाई गई और अब सर्च कमेटी ने तीन नामों का पैनल तैयार किया है।

तीन सदस्यीय सर्च कमेटी ने सौंपी रिपोर्ट

CEO के चयन के लिए बनाई गई तीन सदस्यीय सर्च कमेटी में सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी और पूर्व वैज्ञानिक सुरेश हावड़े शामिल रहे।

कमेटी ने पूरी चयन प्रक्रिया के बाद अपनी अंतिम रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप दी है। रिपोर्ट में तीन उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं। अब इन तीनों में से किसी एक के नाम पर ट्रस्ट अंतिम निर्णय ले सकता है।

आज ट्रस्ट की बैठक में हो सकता है अंतिम फैसला

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक 2 सितंबर को अयोध्या में हो रही है। इस बैठक में CEO की नियुक्ति के अलावा ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था और अन्य संगठनात्मक मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है।

हालांकि, ट्रस्ट की ओर से अंतिम नाम घोषित होने तक किसी एक उम्मीदवार को निश्चित CEO मानना सही नहीं होगा। तीन नामों के पैनल में से किसे जिम्मेदारी दी जाएगी, इसका फैसला बैठक के बाद ही स्पष्ट होगा।

क्यों जरूरी मानी जा रही है पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति?

राम मंदिर में लगातार बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर के निर्माण, संचालन, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, सुरक्षा, वित्तीय प्रबंधन और अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय जैसी जिम्मेदारियां भी बढ़ती जा रही हैं।

ऐसे में एक पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति से मंदिर प्रशासन को एक समर्पित कार्यकारी नेतृत्व मिल सकता है। CEO रोजमर्रा के प्रशासनिक कामकाज की निगरानी करने, विभिन्न समितियों और विभागों के बीच तालमेल बनाने तथा संचालन से जुड़े फैसलों को प्रभावी तरीके से लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

पहले नहीं था समर्पित पूर्णकालिक CEO

राम मंदिर ट्रस्ट अब तक dedicated full-time CEO के बिना ही मंदिर से जुड़े प्रशासनिक और प्रबंधन कार्यों को संचालित करता रहा है। ऐसे में पहली बार इस पद पर पूर्णकालिक नियुक्ति को ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक संस्थागत और पेशेवर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरी ने भी कहा है कि विश्व प्रसिद्ध राम मंदिर के बेहतर प्रबंधन के लिए सक्षम CEO की जरूरत महसूस की गई थी। इसी उद्देश्य से विशेषज्ञों की मदद से चयन प्रक्रिया शुरू की गई।

ट्रस्ट में तीन नए ट्रस्टियों की भी नियुक्ति

CEO की नियुक्ति के साथ ट्रस्ट में संगठनात्मक स्तर पर भी बदलाव देखने को मिल रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रस्ट ने बैठक के दौरान तीन नए ट्रस्टियों की नियुक्ति की है।

इससे ट्रस्ट की संरचना को और मजबूत करने तथा मंदिर से जुड़े प्रशासनिक कार्यों के संचालन में नई जिम्मेदारियां तय करने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है।

CEO के सामने होंगी कई बड़ी जिम्मेदारियां

पहले पूर्णकालिक CEO के सामने राम मंदिर के विस्तृत प्रशासन को व्यवस्थित करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। इनमें मंदिर परिसर का संचालन, श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए व्यवस्थाएं, अलग-अलग समितियों के बीच समन्वय, प्रशासनिक प्रक्रियाओं की निगरानी और भविष्य की परियोजनाओं का प्रबंधन शामिल हो सकता है।

इसके अलावा निर्माण और मंदिर परिसर के विस्तार से जुड़े कार्यों के साथ वित्तीय तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं में भी CEO की भूमिका महत्वपूर्ण रहने की उम्मीद है।

मंदिर प्रबंधन में आएगा नया प्रशासनिक ढांचा

CEO की नियुक्ति को केवल एक पद भरने की प्रक्रिया के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। यह राम मंदिर के प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित और संस्थागत बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव हो सकता है।

मंदिर के निर्माण के आगे बढ़ने और श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि के साथ प्रशासनिक चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। ऐसे में पूर्णकालिक कार्यकारी अधिकारी के माध्यम से रोजमर्रा के कामकाज में स्पष्ट जिम्मेदारी और बेहतर समन्वय स्थापित करने की कोशिश की जा सकती है।

अभी किस नाम पर लगेगी मुहर, यही सबसे बड़ा सवाल

फिलहाल ट्रस्ट की ओर से तीनों उम्मीदवारों में से किसी एक का नाम आधिकारिक रूप से घोषित नहीं किया गया है। इसलिए चर्चाओं में सामने आ रहे नामों को अंतिम मानना जल्दबाजी होगी।

अब सभी की नजर ट्रस्ट की आज होने वाली बैठक पर है। बैठक में तीन सदस्यीय सर्च कमेटी की सिफारिशों पर विचार के बाद पहले पूर्णकालिक CEO के नाम पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।

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