22 जुलाई 2026 : केंद्र सरकार ने राज्यसभा में जानकारी दी है कि पंजाब निर्धारित सीमा से 56% अधिक भूजल का दोहन कर रहा है। सरकार के अनुसार, राज्य में भूजल के अत्यधिक उपयोग के कारण जल संसाधनों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है।
केंद्र ने बताया कि पंजाब उन राज्यों में शामिल है जहां सिंचाई और अन्य जरूरतों के लिए भूजल पर अत्यधिक निर्भरता है। लगातार बढ़ते दोहन के चलते कई क्षेत्रों में भूजल स्तर में गिरावट दर्ज की गई है, जो भविष्य में जल संकट का कारण बन सकती है।
सरकार ने कहा कि भूजल संरक्षण और सतत जल प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं लागू की जा रही हैं। इनमें वर्षा जल संचयन, सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को प्रोत्साहन और फसल विविधीकरण जैसे उपाय शामिल हैं, ताकि भूजल पर निर्भरता कम की जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भूजल दोहन की मौजूदा गति जारी रही, तो आने वाले वर्षों में कृषि और पेयजल दोनों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने जल संरक्षण और वैकल्पिक खेती के तरीकों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ मिलकर भूजल संरक्षण के लिए समन्वित प्रयास जारी रखने की बात कही है, ताकि जल संसाधनों का संतुलित और टिकाऊ उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
