13 अक्टूबर 2026: पंजाब में डेंगू के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नई तकनीक का सहारा लेने का फैसला किया है। राज्य सरकार अब पटियाला जिले के डेंगू प्रभावित क्षेत्रों में मच्छरों के लार्वा को खत्म करने के लिए ड्रोन के जरिए लार्वीसाइड का छिड़काव करेगी। इस पहल के तहत 60 दिनों का विशेष अभियान चलाया जाएगा, जिसमें उन स्थानों पर ध्यान दिया जाएगा जहां पारंपरिक तरीकों से पहुंचना मुश्किल है।
पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने 12 अक्टूबर 2026 को मुंबई की कंपनी किरण कॉरपोरेशन/एसपीवी के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस मौके पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह मौजूद रहे। विभाग की ओर से निदेशक डॉ. हितिंदर कौर और कंपनी की ओर से सचिन शेट्टी ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस परियोजना का उद्देश्य डेंगू फैलाने वाले मच्छरों के प्रजनन स्थलों की पहचान करना और वहां लक्षित तरीके से दवा का छिड़काव करना है।
पटियाला में 60 दिन चलेगा विशेष अभियान
इस योजना को 60-Day Emergency Vector Control Cycle के पहले चरण के रूप में लागू किया जाएगा। शुरुआत में पटियाला जिले के उन क्षेत्रों को चुना जाएगा, जहां वर्ष 2025 में डेंगू का प्रकोप अधिक रहा था। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इन स्थानों पर मच्छरों के पनपने की आशंका को कम करने के लिए विशेष निगरानी और नियंत्रण उपाय किए जाएंगे।
इस अभियान में ड्रोन के माध्यम से सरकारी मानकों के अनुसार स्वीकृत लार्वीसाइड और कीटनाशकों का छिड़काव किया जाएगा। इसका उद्देश्य मच्छरों के लार्वा को वयस्क मच्छर बनने से पहले ही खत्म करना है, ताकि बीमारी फैलने की आशंका को कम किया जा सके।
किन जगहों पर होगा ड्रोन का इस्तेमाल?
डेंगू फैलाने वाले मच्छर अक्सर उन स्थानों पर पनपते हैं, जहां पानी जमा रहता है। कुछ जगहों पर पहुंचना स्वास्थ्य विभाग की टीमों के लिए मुश्किल होता है। ऐसे क्षेत्रों में ड्रोन उपयोगी साबित हो सकते हैं।
अभियान के दौरान मुख्य रूप से इन स्थानों पर ध्यान दिया जाएगा:
- बड़े जलभराव वाले क्षेत्र और ठहरा हुआ पानी।
- इमारतों की छतों पर जमा पानी।
- खाली पड़े प्लॉट और उपेक्षित परिसर।
- घनी आबादी वाले इलाके, जहां पारंपरिक छिड़काव करना कठिन है।
- अन्य चिह्नित स्थान, जहां मच्छरों के प्रजनन की अधिक संभावना हो।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह के अनुसार, ड्रोन की मदद से ऐसे स्थानों तक पहुंचना आसान होगा, जहां सामान्य छिड़काव टीमों के लिए काम करना मुश्किल पड़ता है। इससे अभियान को अधिक लक्षित बनाने में सहायता मिल सकती है।
हर दिन होगी निगरानी, सर्वे से जांचे जाएंगे नतीजे
इस अभियान में केवल दवा का छिड़काव ही नहीं किया जाएगा, बल्कि उसके प्रभाव का आकलन भी किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की योजना के अनुसार, रोजाना फील्ड रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके अलावा वैज्ञानिक सर्वेक्षणों के माध्यम से मच्छरों के लार्वा और वयस्क मच्छरों की संख्या में होने वाले बदलाव पर नजर रखी जाएगी।
इन सर्वेक्षणों से यह समझने में मदद मिलेगी कि किन क्षेत्रों में मच्छरों की संख्या कम हुई है और कहां अतिरिक्त नियंत्रण उपायों की जरूरत है। अभियान पूरा होने के 10 दिनों के भीतर संयुक्त समीक्षा की जाएगी। इसके बाद प्राप्त नतीजों के आधार पर यह तय किया जाएगा कि इस तकनीक को पंजाब के अन्य जिलों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है या नहीं।
सरकारी खजाने पर नहीं पड़ेगा वित्तीय बोझ
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि यह पहल गैर-वित्तीय आधार पर संचालित की जा रही है। इसके तहत राज्य के सरकारी खजाने से कोई वित्तीय लेनदेन नहीं होगा। स्वास्थ्य विभाग हॉटस्पॉट की पहचान, आवश्यक मंजूरियों, स्थानीय समन्वय और तकनीकी निगरानी की जिम्मेदारी संभालेगा।
इस व्यवस्था के तहत विभाग का लक्ष्य आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके उन क्षेत्रों में मच्छर नियंत्रण को मजबूत करना है, जहां पारंपरिक तरीके पर्याप्त साबित नहीं होते। हालांकि, अभियान की वास्तविक सफलता का आकलन सर्वेक्षणों और इसके पूरा होने के बाद सामने आने वाले आंकड़ों से किया जाएगा।
‘हर शुक्रवार डेंगू ते वार’ अभियान पर भी जोर
पंजाब सरकार पहले से ही डेंगू की रोकथाम के लिए ‘हर शुक्रवार डेंगू ते वार’ अभियान चला रही है। इसके तहत लोगों को अपने घरों और आसपास पानी जमा न होने देने, मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करने और नियमित सफाई रखने के लिए जागरूक किया जाता है।
स्वास्थ्य मंत्री ने दावा किया कि साप्ताहिक अभियान, घर-घर जाकर लार्वा की जांच और लोगों की भागीदारी से राज्य में डेंगू के मामलों को कम करने में मदद मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि इस वर्ष डेंगू से संबंधित मौतों की संख्या शून्य रही है। यह विभाग की ओर से प्रस्तुत दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि के लिए आधिकारिक स्वास्थ्य आंकड़ों को देखना जरूरी होगा।
लोगों की भागीदारी भी जरूरी
ड्रोन से छिड़काव और तकनीकी निगरानी के बावजूद डेंगू नियंत्रण के लिए नागरिकों की भागीदारी जरूरी है। घरों, छतों, गमलों, कूलरों और पानी की टंकियों के आसपास जमा पानी मच्छरों के प्रजनन का कारण बन सकता है। इसलिए लोगों को नियमित रूप से इन जगहों की जांच करनी चाहिए और पानी जमा होने से रोकना चाहिए।
डेंगू की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग की निगरानी, समय पर कार्रवाई और जन-जागरूकता का एक साथ काम करना महत्वपूर्ण है। पटियाला में शुरू किया जा रहा 60 दिनों का ड्रोन अभियान इसी दिशा में एक नई पहल है। इसके परिणामों के आधार पर आने वाले समय में पंजाब के अन्य जिलों में भी इस तकनीक के इस्तेमाल पर फैसला लिया जा सकता है।
