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जालंधर की मल्लिका हांडा ने एशिया-पैसिफिक डेफ चैंपियनशिप में जीता कांस्य पदक

13 अक्टूबर 2026:  पंजाब के जालंधर की शतरंज खिलाड़ी मल्लिका हांडा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत का नाम रोशन किया है। मल्लिका ने मलेशिया में आयोजित एशिया-पैसिफिक डेफ मल्टी-स्पोर्ट चैंपियनशिप 2026 में कांस्य पदक अपने नाम किया। सुनने और बोलने में असमर्थ मल्लिका ने अपनी मेहनत, लगन और खेल के प्रति समर्पण से एक बार फिर साबित किया कि मजबूत इच्छाशक्ति के साथ बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।

मल्लिका की इस उपलब्धि से जालंधर सहित पंजाब के खेल जगत में खुशी का माहौल है। उन्होंने महिलाओं की व्यक्तिगत क्लासिकल शतरंज स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल किया। यह प्रतियोगिता मलेशिया के पेनांग में आयोजित की गई थी, जिसमें विभिन्न देशों के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया।

राष्ट्रीय चैंपियनशिप में भी जीत चुकी हैं गोल्ड मेडल

मल्लिका हांडा इससे पहले भी कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुकी हैं। सितंबर 2026 में नई दिल्ली में 17 से 21 सितंबर तक आयोजित राष्ट्रीय डेफ शतरंज चैंपियनशिप में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था। यह उनकी राष्ट्रीय चैंपियनशिप में नौवीं स्वर्ण पदक जीत थी।

उनके खेल करियर को लगभग 14 साल हो चुके हैं। इस दौरान उन्होंने लगातार प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर अपनी पहचान बनाई है। राष्ट्रीय स्तर पर नौवां स्वर्ण पदक जीतने के बाद एशिया-पैसिफिक प्रतियोगिता में कांस्य पदक हासिल करना उनके करियर की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

मल्लिका की सफलता उन खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा है, जो शारीरिक चुनौतियों के बावजूद खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं। उनकी उपलब्धियां यह दिखाती हैं कि प्रतिभा, नियमित अभ्यास और दृढ़ संकल्प किसी खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

जनवरी 2027 में विंटर डेफलिम्पिक्स में करेंगी भारत का प्रतिनिधित्व

मल्लिका हांडा के लिए अगला बड़ा अवसर जनवरी 2027 में आने वाला है। उनकी मां रेणु हांडा के अनुसार, मल्लिका ऑस्ट्रिया में आयोजित होने वाले विंटर डेफलिम्पिक्स में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। यह उनके खेल करियर के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव होगा।

डेफलिम्पिक्स सुनने में असमर्थ खिलाड़ियों के लिए आयोजित होने वाला अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन है। इसमें खिलाड़ी विभिन्न खेलों में अपने देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। मल्लिका की आगामी भागीदारी को देखते हुए उनकी तैयारी और प्रदर्शन पर खेल प्रेमियों की नजर रहेगी।

हालांकि, विंटर डेफलिम्पिक्स में उनकी भागीदारी से संबंधित विस्तृत कार्यक्रम और शतरंज स्पर्धा की जानकारी के लिए आधिकारिक आयोजन विवरण देखना जरूरी है।

पदकों के बावजूद सरकारी नौकरी का इंतजार

मल्लिका की अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों के बीच उनकी सरकारी नौकरी की मांग भी चर्चा में है। उनकी मां रेणु हांडा ने कहा है कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार पदक जीतने के बावजूद मल्लिका को अब तक सरकारी नौकरी नहीं मिली है। उनके मुताबिक, परिवार कई वर्षों से रोजगार के अवसर के लिए मंत्रियों और राजनीतिक नेताओं से संपर्क कर रहा है, लेकिन उन्हें ठोस समाधान नहीं मिला है।

परिवार का कहना है कि मल्लिका ने अपने खेल करियर में लगातार मेहनत की है और देश के लिए कई पदक हासिल किए हैं। ऐसे में वे चाहती हैं कि उनकी खेल उपलब्धियों को ध्यान में रखते हुए रोजगार का अवसर दिया जाए।

मल्लिका की सरकारी नौकरी से जुड़ा मुद्दा पहले भी सार्वजनिक चर्चा में आ चुका है। वर्ष 2022 में उनकी उपलब्धियों और सरकारी सहायता की मांग को लेकर भी खबरें प्रकाशित हुई थीं। उस समय नौकरी और पुरस्कार राशि से संबंधित दावों पर पंजाब सरकार के प्रतिनिधियों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।

मल्लिका की उपलब्धि बनी प्रेरणा

मल्लिका हांडा की ताजा सफलता केवल एक पदक जीतने तक सीमित नहीं है। यह उनके लंबे खेल सफर, नियमित अभ्यास और प्रतियोगिताओं में लगातार भागीदारी का परिणाम है। राष्ट्रीय चैंपियनशिप में नौ स्वर्ण पदक और अब एशिया-पैसिफिक स्तर पर कांस्य पदक जीतना उनके अनुभव और कौशल को दर्शाता है।

उनकी कहानी यह भी सामने लाती है कि खिलाड़ियों की सफलता के साथ उनके प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता और रोजगार जैसे विषयों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों को खेल जारी रखने के लिए उचित सुविधाएं और अवसर मिलना उनके भविष्य के लिए अहम हो सकता है।

मल्लिका हांडा की इस उपलब्धि से जालंधर और पंजाब के खेल प्रेमियों को गर्व करने का मौका मिला है। अब उनके प्रशंसकों की नजर जनवरी 2027 में होने वाले आगामी अंतरराष्ट्रीय आयोजन पर है, जहां वह एक बार फिर भारत का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी करेंगी।

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