13 अक्टूबर 2026: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जगतार सिंह हवारा को अपनी बीमार मां से मिलने के लिए पैरोल दिए जाने के मामले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने का भरोसा दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि हवारा को मां से मिलने के लिए पैरोल दी जाती है, तो पंजाब सरकार राज्य में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाएगी। इस संबंध में राज्य सरकार केंद्र सरकार और पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को आश्वासन दे चुकी है।
बंदी सिंहों की रिहाई के लिए कानूनी रास्ते अपनाने की बात
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोमवार को चंडीगढ़ स्थित पंजाब भवन में कौमी इंसाफ मोर्चा, किसान संगठनों और अन्य सिख संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार बंदी सिंहों की रिहाई के लिए सभी कानूनी और संवैधानिक विकल्पों पर काम करेगी।
मान ने कहा कि यह मुद्दा अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रहना चाहिए और इससे जुड़े मामलों को कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
बीमार मां से मिलने के लिए पैरोल की मांग
जगतार सिंह हवारा पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की 1995 में हुई हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद जेल में बंद हैं। उनकी मां की खराब सेहत को देखते हुए उन्हें उनसे मिलने के लिए पैरोल देने की मांग उठ रही है।
मुख्यमंत्री मान ने इससे पहले हवारा को 10 दिन की पैरोल देने की सिफारिश की थी। हालांकि, 13 अक्टूबर तक सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले में केंद्र की मंजूरी नहीं मिली थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार अपनी ओर से आवश्यक आश्वासन दे चुकी है।
कौमी इंसाफ मोर्चा लंबे समय से कर रहा है प्रदर्शन
कौमी इंसाफ मोर्चा और अन्य सिख संगठन बंदी सिंहों की रिहाई की मांग को लेकर लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे हैं। मोर्चा 7 जनवरी 2023 से मोहाली-चंडीगढ़ सीमा के पास YPS चौक के नजदीक धरना दे रहा है।
संगठनों की मांग है कि उन सिख कैदियों के मामलों पर ध्यान दिया जाए, जिनके बारे में उनका कहना है कि वे अपनी सजा पूरी करने के बावजूद जेल में बंद हैं। मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान इन मांगों और पैरोल से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
परमजीत सिंह भेओरा और जगतार सिंह तारा के मामलों पर भी चर्चा
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि वह परमजीत सिंह भेओरा और जगतार सिंह तारा के पैरोल मामलों को भी पंजाब के राज्यपाल के सामने उठाएंगे। उन्होंने संगठनों से अपना आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखने की अपील भी की।
मान के अनुसार, राज्य सरकार इस मुद्दे पर कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है।
पैरोल पर अंतिम फैसला अभी महत्वपूर्ण
मुख्यमंत्री की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने का भरोसा दिए जाने के बावजूद पैरोल का मामला संबंधित अधिकारियों और केंद्र की मंजूरी सहित आवश्यक प्रक्रियाओं पर निर्भर है। इसलिए इसे पैरोल की अंतिम मंजूरी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
