18 सितंबर, 2026 : पंजाब में सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच लंबे समय से चल रहे गतिरोध को खत्म करने की कोशिश के तहत मुख्यमंत्री भगवंत मान आज कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ अहम बैठक करेंगे। बैठक शुक्रवार सुबह 11 बजे चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री आवास पर होगी। इसमें अलग-अलग कर्मचारी संगठनों और पेंशनर्स संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
मुख्यमंत्री के साथ होने वाली इस बैठक में लंबित महंगाई भत्ते (DA) के बकाये सहित कर्मचारियों की कई पुरानी मांगों पर चर्चा होने की उम्मीद है। सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच अगस्त में बातचीत टूटने के बाद यह आमने-सामने की महत्वपूर्ण बैठक मानी जा रही है।
12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बैठक में होगा शामिल
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कर्मचारी संगठनों से बैठक में शामिल होने वाले प्रतिनिधियों के नाम मांगे गए थे। इसके बाद कर्मचारी संगठनों ने 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल तय किया है।
इस प्रतिनिधिमंडल में अलग-अलग कर्मचारी संगठनों, संयुक्त कर्मचारी मंच और पेंशनर्स संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। कर्मचारी नेताओं ने बैठक से पहले अपने प्रमुख मुद्दों और मांगों को लेकर तैयारी की है।
DA का लंबित बकाया रहेगा प्रमुख मुद्दा
बैठक में सबसे प्रमुख मुद्दों में कर्मचारियों और पेंशनर्स के लंबित DA बकाये का भुगतान शामिल है। कर्मचारी संगठन लंबे समय से 18 प्रतिशत DA बकाया जारी करने की मांग कर रहे हैं।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि महंगाई भत्ते से जुड़े बकाये का भुगतान लंबे समय से लंबित है और इसे जल्द जारी किया जाना चाहिए। दूसरी ओर, राज्य सरकार वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए सभी मांगों को एक साथ पूरा करने की कठिनाइयों की बात कहती रही है।
पुरानी पेंशन योजना की मांग भी उठेगी
कर्मचारी संगठन DA के अलावा पुरानी पेंशन योजना यानी OPS को लागू करने की मांग भी उठा रहे हैं। इसके साथ ही वेतन और सेवा से जुड़े कई अन्य मुद्दे भी बैठक के एजेंडे में शामिल होने की संभावना है।
कर्मचारी संगठनों की ओर से पंजाब पे-स्केल और केंद्रीय वेतनमान से जुड़े अंतर को दूर करने, सेवा लाभ बहाल करने और अन्य लंबित मांगों को पूरा करने की मांग भी की जा रही है।
27 अगस्त की हड़ताल के बाद बढ़ा था विवाद
पंजाब में कर्मचारी संगठनों ने 27 अगस्त को बड़े स्तर पर सामूहिक अवकाश लेकर ‘महा हड़ताल’ की थी। कर्मचारी संगठन DA बकाये और अन्य मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे थे।
सरकार की ओर से उस दौरान अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके बाद कर्मचारी संगठनों ने विरोध तेज करने की चेतावनी दी थी। बाद में सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत को फिर से आगे बढ़ाने की कोशिश शुरू हुई।
पहले भी तय हुई थी CM और कर्मचारियों की बैठक
मुख्यमंत्री भगवंत मान और कर्मचारी संगठनों के बीच इससे पहले 27 अगस्त को जालंधर में बैठक प्रस्तावित थी। हालांकि, उस दिन बैठक नहीं हो सकी।
मुख्यमंत्री की ओर से उस समय कहा गया था कि बातचीत और हड़ताल एक साथ नहीं चल सकती। कर्मचारी संगठनों ने इस शर्त को स्वीकार नहीं किया था, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बना रहा। अब करीब तीन सप्ताह बाद मुख्यमंत्री ने कर्मचारी संगठनों के साथ फिर से सीधे बातचीत का रास्ता खोला है।
कैबिनेट सब-कमेटी के सदस्य भी रहेंगे मौजूद
आज की बैठक में मुख्यमंत्री के साथ कर्मचारियों की मांगों पर विचार कर रही कैबिनेट सब-कमेटी के सदस्य भी शामिल होंगे। इसमें वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, मंत्री अमन अरोड़ा और डॉ. बलजीत कौर शामिल हैं।
इन मंत्रियों ने सितंबर की शुरुआत में कर्मचारी संगठनों के साथ बातचीत का रास्ता खोलने की पहल की थी। सरकार ने उस समय भी कहा था कि वह कर्मचारियों और पेंशनर्स की शिकायतों पर बातचीत के लिए तैयार है।
अक्टूबर की सैलरी को लेकर भी चर्चा संभव
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यदि बैठक में दोनों पक्षों के बीच किसी तरह का समझौता होता है तो कर्मचारियों को अक्टूबर की सैलरी के साथ कुछ अतिरिक्त वित्तीय लाभ देने पर विचार हो सकता है।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि बैठक के बाद सरकार किन मांगों पर तत्काल फैसला लेगी। सरकार की वित्तीय स्थिति और कर्मचारियों की लंबित मांगों के बीच संतुलन बनाना बैठक में महत्वपूर्ण मुद्दा रहेगा।
सरकार और कर्मचारियों के बीच समाधान की कोशिश
पंजाब में कर्मचारी संगठनों का आंदोलन एक महीने से अधिक समय से जारी है। 27 अगस्त की सामूहिक छुट्टी के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ा था। अब मुख्यमंत्री स्तर पर होने वाली बैठक से बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश की जा रही है।
कर्मचारी संगठनों की ओर से DA बकाये, OPS, वेतन ढांचे और अन्य सेवा संबंधी मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा। वहीं सरकार की ओर से राज्य की वित्तीय स्थिति और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखते हुए मांगों पर चर्चा किए जाने की संभावना है।
