18 सितंबर, 2026 : पंजाब के गुरदासपुर से ताल्लुक रखने वाले अंतरराष्ट्रीय जुडो खिलाड़ी जसलीन सैनी ने डोपिंग मामले से क्लियर होने के बाद एक बार फिर मैट पर वापसी की है। अब उनकी नजर वर्ष 2028 में होने वाले लॉस एंजिल्स ओलंपिक पर है। करीब तीन साल पहले एक प्रतिबंधित पदार्थ के अनजाने में सेवन के कारण उनके करियर को बड़ा झटका लगा था। अब मामले से क्लियर होने के बाद वह दोबारा अपने खेल करियर को आगे बढ़ाने में जुट गए हैं।
डोपिंग मामले के बाद करियर पर लगा था ब्रेक
जसलीन सैनी पंजाब पुलिस में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) हैं और 66 किलोग्राम भार वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इंटरनेशनल टेस्टिंग एजेंसी (ITA) ने प्रतिबंधित पदार्थ के सेवन के मामले में उन्हें निलंबित किया था। रिपोर्ट के अनुसार, यह पदार्थ उन्होंने अनजाने में लिया था।
इस मामले के बाद पंजाब सरकार ने उन्हें दिया गया महाराजा रणजीत सिंह अवॉर्ड भी फिलहाल रोक दिया था। अब सैनी के मामले में क्लियरेंस मिलने के बाद जुडो अधिकारियों ने संबंधित अधिकारियों से यह सम्मान उन्हें दोबारा जारी करने की मांग की है।
2019 कॉमनवेल्थ गेम्स में जीता था गोल्ड
जसलीन सैनी का अंतरराष्ट्रीय करियर काफी उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने 2019 कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था। वह 2020 टोक्यो ओलंपिक के लिए भी क्वालीफाई करने के करीब पहुंचे थे, लेकिन एक तकनीकी कारण के चलते ओलंपिक में जगह नहीं बना सके।
उन्होंने वर्ल्ड सीनियर जुडो चैंपियनशिप के अलावा कुवैत सिटी, मैड्रिड, दुशांबे, तेल अवीव और उलानबटोर जैसे अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता स्थलों पर भी भारत का प्रतिनिधित्व किया है।
2028 ओलंपिक के लिए नई शुरुआत
डोपिंग मामले के कारण लंबे समय तक खेल से दूर रहने के बाद सैनी की मैट पर वापसी उनके करियर के लिए एक नया चरण है। अब उनका लक्ष्य 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए खुद को तैयार करना है।
ओलंपिक जुडो प्रतियोगिता के लिए क्वालीफिकेशन प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चलती है। इंटरनेशनल जूडो फेडरेशन के अनुसार 2028 ओलंपिक की व्यक्तिगत ओलंपिक रैंकिंग प्रक्रिया जारी है और अंतिम क्वालीफिकेशन सूची बाद के चरण में प्रकाशित की जाएगी।
विदेश में भी जारी रखा था प्रशिक्षण
सैनी के करियर में मुश्किल दौर पहले भी आए हैं। 2019 में वह जॉर्जिया में त्बिलिसी ग्रां प्री के लिए पहुंचे थे। प्रतियोगिता रद्द होने के बाद वह वहां फंस गए थे और उनके पास सीमित संसाधन थे।
इस दौरान जॉर्जिया के प्रसिद्ध कोच मामुका किजिलाशविली ने उनकी मदद की। उन्होंने सैनी को अपने गांव अखमेता में रहने, काम करने और प्रशिक्षण जारी रखने का अवसर दिया। कोविड-19 के दौरान जब कई प्रशिक्षण केंद्र बंद थे, तब भी सैनी ने वहां अपनी ट्रेनिंग जारी रखी।
कोच ने की वापसी की सराहना
सैनी की वापसी को उनके लंबे समय से जुड़े कोच अमरजीत शास्त्री ने भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि खेल में मुश्किल परिस्थितियों के बाद वापसी करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि होती है।
सैनी के लिए यह वापसी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि डोपिंग मामले के कारण उनके अंतरराष्ट्रीय करियर पर लंबा विराम लगा था। अब क्लियर होने के बाद वह दोबारा प्रतिस्पर्धी जुडो में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
महाराजा रणजीत सिंह अवॉर्ड मिलने की उम्मीद
डोपिंग मामले के कारण पंजाब सरकार ने सैनी का महाराजा रणजीत सिंह अवॉर्ड फिलहाल रोक दिया था। अब उनके क्लियर होने के बाद जुडो अधिकारियों ने सरकार से इस सम्मान को दोबारा जारी करने की मांग की है।
यह सम्मान पंजाब में खेल के क्षेत्र में दिया जाने वाला प्रमुख राज्य स्तरीय सम्मान है। सैनी के अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन और 2019 कॉमनवेल्थ गेम्स के गोल्ड मेडल को देखते हुए इस सम्मान को लेकर भी अब फिर से प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।
2028 में देश का प्रतिनिधित्व करने का लक्ष्य
करीब तीन साल के मुश्किल दौर के बाद जसलीन सैनी अब अपने खेल करियर को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका अगला बड़ा लक्ष्य 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करना है।
हालांकि ओलंपिक में जगह बनाने के लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन, रैंकिंग और क्वालीफिकेशन प्रक्रिया के निर्धारित मानकों को पूरा करना होगा। फिलहाल उनकी वापसी ने भारतीय जुडो में एक अनुभवी खिलाड़ी के फिर से सक्रिय होने की उम्मीद जरूर बढ़ाई है।
