25 सितंबर 2026 पंजाब के जालंधर की सुनने और बोलने में असमर्थ शतरंज खिलाड़ी मल्लिका हांडा ने एक बार फिर अपनी खेल प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया है। मल्लिका ने दिल्ली में आयोजित नेशनल चेस चैंपियनशिप फॉर द डेफ में स्वर्ण पदक जीतकर अपने राष्ट्रीय स्वर्ण पदकों की संख्या 9 कर ली है। यह उपलब्धि उनके करीब 14 साल लंबे खेल करियर में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है।
दिल्ली में आयोजित हुई राष्ट्रीय शतरंज चैंपियनशिप
नेशनल चेस चैंपियनशिप फॉर द डेफ का आयोजन नई दिल्ली में 17 से 21 सितंबर 2026 तक किया गया। इसी प्रतियोगिता में मल्लिका हांडा ने स्वर्ण पदक हासिल किया। लगातार राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाली मल्लिका ने इस जीत के साथ एक बार फिर अपनी क्षमता साबित की है।
मल्लिका की इस उपलब्धि से उनके परिवार और जालंधर के खेल प्रेमियों में खुशी का माहौल है। उनके लिए यह सिर्फ एक और पदक नहीं है, बल्कि वर्षों की मेहनत और खेल के प्रति समर्पण का परिणाम है।
राष्ट्रीय स्तर पर 9वां गोल्ड मेडल
मल्लिका हांडा के नाम अब राष्ट्रीय चैंपियनशिप में 9 स्वर्ण पदक हो चुके हैं। करीब 14 वर्षों से वह शतरंज के क्षेत्र में सक्रिय हैं और लगातार राष्ट्रीय स्तर पर पंजाब का प्रतिनिधित्व करती रही हैं।
उनकी उपलब्धियां यह दिखाती हैं कि शारीरिक चुनौतियों के बावजूद किसी खिलाड़ी की प्रतिभा और मेहनत उसे बड़े मुकाम तक पहुंचा सकती है। मल्लिका ने शतरंज को अपना करियर बनाया और लगातार प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर अपनी पहचान कायम की।
अब 2027 विंटर डेफ ओलंपिक्स में करेंगी भारत का प्रतिनिधित्व
राष्ट्रीय चैंपियनशिप में ताजा स्वर्ण पदक जीतने के बाद मल्लिका हांडा अब जनवरी 2027 में ऑस्ट्रिया में होने वाली विंटर डेफ ओलंपिक्स में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। यह उनके अंतरराष्ट्रीय खेल करियर के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर होगा।
मल्लिका की नजर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए बेहतर प्रदर्शन करने पर होगी। राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार सफलता के बाद वह अगले बड़े मंच की तैयारी करेंगी।
वर्षों से सरकारी नौकरी की मांग
खेल में लगातार उपलब्धियां हासिल करने के बावजूद मल्लिका हांडा की सरकारी नौकरी की मांग अभी तक पूरी नहीं हुई है। उनकी मां रेणु हांडा ने बताया कि परिवार पिछले कई वर्षों से सरकारी नौकरी के लिए प्रयास कर रहा है।
उनके अनुसार, उन्होंने कई बार मंत्रियों और राजनीतिक नेताओं से मुलाकात कर मल्लिका की खेल उपलब्धियों के आधार पर रोजगार का अवसर देने की मांग रखी है। परिवार को कई बार आश्वासन मिलने की बात कही गई, लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई ठोस समाधान नहीं हुआ है।
परिवार को अब भी ठोस फैसले का इंतजार
मल्लिका की मां का कहना है कि लगातार राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के बावजूद उनकी बेटी को नौकरी के लिए लंबे समय से इंतजार करना पड़ रहा है। परिवार का कहना है कि वे कई वर्षों से इस मुद्दे को संबंधित लोगों के सामने उठाते रहे हैं।
उनका कहना है कि हर बार नेताओं और मंत्रियों से मिलने पर आश्वासन मिलता है, लेकिन सरकारी नौकरी के मामले में अभी तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है।
खेल उपलब्धियों के बीच रोजगार का सवाल
मल्लिका हांडा की कहानी खेल उपलब्धियों के साथ-साथ दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए रोजगार और करियर के अवसरों के सवाल को भी सामने लाती है। राष्ट्रीय स्तर पर लगातार सफलता हासिल करने वाले खिलाड़ियों के लिए खेल के बाद स्थायी रोजगार का अवसर उनके भविष्य को सुरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
मल्लिका ने शतरंज में लगातार मेहनत कर राष्ट्रीय स्तर पर 9 स्वर्ण पदक हासिल किए हैं और अब उनका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करना है।
पंजाब का नाम रोशन कर रही हैं मल्लिका
जालंधर की मल्लिका हांडा ने अपनी उपलब्धियों से पंजाब का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। उनकी हालिया जीत के बाद अब खेल प्रेमियों की नजर जनवरी 2027 में होने वाली विंटर डेफ ओलंपिक्स पर होगी।
लगातार पदक जीतने वाली मल्लिका के सामने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने की चुनौती होगी। वहीं, उनके परिवार को उम्मीद है कि उनकी खेल उपलब्धियों और लंबे संघर्ष को देखते हुए सरकारी नौकरी की मांग पर भी जल्द ठोस फैसला लिया जाएगा।
