5 अक्टूबर 2026 एशियन गेम्स में पंजाब के खिलाड़ियों का प्रदर्शन 2022 के रिकॉर्ड के मुकाबले इस बार काफी कमजोर रहा। जापान के आइची-नागोया में आयोजित 2026 एशियन गेम्स में पंजाब के खिलाड़ियों ने कुल 9 पदक अपने नाम किए, जबकि 2022 के हांगझोउ एशियन गेम्स में राज्य के खिलाड़ियों ने रिकॉर्ड 19 पदक जीते थे। 2022 में पंजाब के खाते में 8 स्वर्ण, 6 रजत और 5 कांस्य पदक आए थे।
2022 में पंजाब ने बनाया था रिकॉर्ड
हांगझोउ एशियन गेम्स में पंजाब के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए राज्य के लिए अब तक का सबसे बेहतरीन पदक प्रदर्शन किया था। 19 पदकों में 8 स्वर्ण, 6 रजत और 5 कांस्य शामिल थे।
उस प्रदर्शन के बाद पंजाब के खिलाड़ियों से भविष्य में भी बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में इसी तरह के प्रदर्शन की उम्मीद की गई थी। हालांकि, 2026 के एशियन गेम्स में राज्य इस प्रदर्शन को दोहरा नहीं सका।
2026 में 27 खिलाड़ियों ने लिया हिस्सा
आइची-नागोया एशियन गेम्स में पंजाब से 27 खिलाड़ी भारतीय दल का हिस्सा बने। इन खिलाड़ियों ने अलग-अलग खेलों में राज्य का प्रतिनिधित्व किया और कुल 9 पदक हासिल किए।
रिपोर्ट के अनुसार पंजाब के खिलाड़ियों की सबसे बड़ी सफलता टीम खेलों में देखने को मिली। हॉकी और क्रिकेट में पंजाब के खिलाड़ियों ने पदक जीतकर राज्य की मौजूदगी मजबूत रखी।
इन खिलाड़ियों ने बढ़ाया पंजाब का मान
2026 एशियन गेम्स में पंजाब की ओर से पदक जीतने या अहम प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों में मानसा के तजिंदरपाल सिंह तूर, जालंधर के गुरिंदरवीर सिंह, मानसा के सतनाम सिंह, पटियाला की परिनाज धालीवाल, बठिंडा के भवतेघ सिंह गिल, अमृतसर के हरमनप्रीत सिंह, मोगा की हरमनप्रीत कौर और जालंधर के दिलप्रीत सिंह शामिल रहे।
तजिंदरपाल सिंह तूर ने शॉटपुट में रजत पदक जीता। वह इससे पहले लगातार दो एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीत चुके थे। 2026 में उन्हें रजत से संतोष करना पड़ा।
गुरिंदरवीर सिंह 100 मीटर के सेमीफाइनल तक पहुंचे और बाद में रिले में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे। वहीं सतनाम सिंह ने रोइंग में कांस्य पदक हासिल किया।
हॉकी और क्रिकेट ने संभाली पंजाब की स्थिति
पंजाब के लिए टीम खेल एक बार फिर सबसे मजबूत क्षेत्र साबित हुए। पुरुष हॉकी में अमृतसर के हरमनप्रीत सिंह और जालंधर के दिलप्रीत सिंह जैसे खिलाड़ियों ने भारत को सफलता दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
महिला क्रिकेट में मोगा की हरमनप्रीत कौर की कप्तानी भी पंजाब की पहचान बनी रही। रिपोर्ट के मुताबिक हॉकी और महिला क्रिकेट ने लगातार दूसरी बार एशियन गेम्स में पदक हासिल किए।
व्यक्तिगत खेलों में प्रदर्शन को लेकर चिंता
पंजाब के कम पदकों के पीछे व्यक्तिगत खेलों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं होना भी एक बड़ी चिंता के रूप में सामने आया है। पूर्व हॉकी ओलंपियन हरदीप सिंह ने कहा कि किसी खिलाड़ी को पदक स्तर तक पहुंचाने के लिए कई वर्षों तक लगातार समर्थन की जरूरत होती है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पंजाब में प्रतिभाओं की पहचान और उन्हें लंबे समय तक तैयार करने की प्रक्रिया लगातार नहीं हो पा रही है। उनके अनुसार कोचों के प्रदर्शन और खिलाड़ियों की तैयारी को लेकर भी जवाबदेही जरूरी है।
हरियाणा से तुलना ने बढ़ाई चिंता
2026 एशियन गेम्स में पंजाब और पड़ोसी राज्य हरियाणा के प्रदर्शन में भी बड़ा अंतर दिखाई दिया। रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा के 80 खिलाड़ियों ने 25 पदक जीते, जबकि पंजाब के 27 खिलाड़ियों के खाते में 9 पदक आए।
हरियाणा के खिलाड़ियों ने कुश्ती और बॉक्सिंग जैसे व्यक्तिगत खेलों में भी मजबूत प्रदर्शन किया। इसके मुकाबले पंजाब की सफलता मुख्य रूप से हॉकी और क्रिकेट जैसे टीम खेलों पर निर्भर रही।
खेलों पर निवेश और इनाम की नीति भी चर्चा में
रिपोर्ट के अनुसार पंजाब सरकार ने अपने खिलाड़ियों की तैयारी के लिए करीब 9 करोड़ रुपये खर्च किए थे। वहीं पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के लिए पंजाब में स्वर्ण पर 1 करोड़, रजत पर 75 लाख और कांस्य पर 50 लाख रुपये के पुरस्कार की व्यवस्था बताई गई है।
हरियाणा में पदक विजेताओं को इससे अधिक पुरस्कार दिए जाते हैं। रिपोर्ट में हरियाणा के लिए स्वर्ण पर 3 करोड़, रजत पर 1.5 करोड़ और कांस्य पर 75 लाख रुपये के पुरस्कार का उल्लेख है।
‘खेडां वतन पंजाब दियां’ से भविष्य की उम्मीद
पंजाब सरकार की ओर से प्रतिभाओं की पहचान और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए ‘खेडां वतन पंजाब दियां’ जैसे कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार खेल प्रतिभाओं को कम उम्र में पहचानकर तैयार करने की प्रक्रिया का असर आने वाले वर्षों में दिखाई दे सकता है।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े टूर्नामेंटों में पदक जीतने के लिए केवल पुरस्कार राशि पर्याप्त नहीं है। खिलाड़ियों को बेहतर कोचिंग, आधुनिक सुविधाएं, नियमित अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर और लंबे समय तक आर्थिक एवं संस्थागत समर्थन की जरूरत होती है।
कुल मिलाकर, 2022 के एशियन गेम्स में 19 पदकों का रिकॉर्ड बनाने वाला पंजाब 2026 में 9 पदकों तक सिमट गया। हालांकि राज्य के खिलाड़ियों ने हॉकी, क्रिकेट, एथलेटिक्स, रोइंग और शूटिंग में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, लेकिन व्यक्तिगत खेलों में लगातार प्रतिभाओं को तैयार करने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की चुनौती अब भी बनी हुई है।
