3 नवंबर 2026 : पंजाब में मोहाली स्थित कालकट भवन को कृषि विभाग से उद्योग विभाग को हस्तांतरित करने के कैबिनेट के फैसले पर नया विवाद खड़ा हो गया है। कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां के नेतृत्व वाले कृषि विभाग ने इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए सरकार से दोबारा विचार करने की मांग की है। विभाग ने उद्योग विभाग को पूरी इमारत सौंपने के बजाय उसका एक फ्लोर देने का प्रस्ताव रखा है।
मोहाली के एयरपोर्ट रोड पर स्थित कालकट भवन में पंजाब राज्य किसान एवं कृषि श्रमिक आयोग और पंजाब बायोटेक्नोलॉजी पार्क के कार्यालय भी हैं। किसान संगठनों ने पहले ही इस इमारत को उद्योग विभाग को सौंपने के प्रस्ताव पर विरोध जताया था।
21 जुलाई को कैबिनेट ने दी थी मंजूरी
पंजाब कैबिनेट ने 21 जुलाई 2026 को कालकट भवन को उद्योग विभाग के हवाले करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य यहां एकीकृत इनोवेशन और स्टार्टअप सेंटर स्थापित करना है। सरकार की दलील थी कि इमारत का मौजूदा उपयोग उसकी क्षमता के अनुरूप नहीं हो रहा है। इसलिए वहां उपलब्ध जमीन, भवन और अन्य संपत्तियों का इस्तेमाल नए स्टार्टअप प्रोजेक्ट के लिए किया जाना चाहिए।
इस फैसले के तहत भवन में मौजूद मौजूदा विभागों को दूसरी उपयुक्त जगहों पर स्थानांतरित करने की योजना थी। हालांकि, कैबिनेट के निर्णय के बाद किसान संगठनों ने इसका विरोध किया और कालकट भवन को किसानों के लिए बने संस्थान के रूप में ही बनाए रखने की मांग उठाई।
जमीन आवंटन की शर्तों का दिया हवाला
कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने 22 अक्टूबर को उद्योग मंत्री अमन अरोड़ा की अध्यक्षता में हुई 12 सदस्यीय समिति की बैठक में इस हस्तांतरण पर अपनी आपत्तियां रखीं। बैठक में भवन की संपत्तियों की सूची, तकनीकी नक्शे, औपचारिक हस्तांतरण और पंजाब स्मॉल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कॉरपोरेशन लिमिटेड को नोडल एजेंसी बनाने जैसे मुद्दों पर चर्चा होनी थी।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बैठक में बताया कि कालकट भवन के लिए जमीन ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) ने 16 मार्च 2016 को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग को आवंटित की थी। विभाग ने आवंटन पत्र की शर्तों का हवाला देते हुए कहा कि जमीन या उससे जुड़े अधिकारों को बिक्री, उपहार, गिरवी या किसी अन्य तरीके से हस्तांतरित करने की अनुमति नहीं थी।
कृषि मंत्री ने किसान संगठनों की आपत्तियों को भी अपने रुख का आधार बताया। इसी कारण उन्होंने पहले मंजूर किए गए हस्तांतरण प्रस्ताव पर दोबारा विचार करने की जरूरत जताई।
उद्योग विभाग को एक फ्लोर देने का प्रस्ताव
कृषि विभाग ने पूरी इमारत उद्योग विभाग को सौंपने के बजाय उसका एक फ्लोर देने का विकल्प रखा है। इस प्रस्ताव के तहत भवन में कृषि और किसानों से जुड़े मौजूदा संस्थानों की गतिविधियां जारी रखी जा सकती हैं, जबकि उद्योग विभाग अपने इनोवेशन और स्टार्टअप सेंटर के लिए उपलब्ध जगह का इस्तेमाल कर सकेगा।
हालांकि, इस वैकल्पिक प्रस्ताव पर सरकार की अंतिम सहमति अभी सामने नहीं आई है। कैबिनेट के पहले के फैसले और कृषि विभाग की नई आपत्तियों के बीच अब मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के स्तर पर दोबारा विचार किया जाना है।
समिति ने मुख्यमंत्री को नया ज्ञापन भेजने की सिफारिश की
बैठक के बाद 12 सदस्यीय समिति ने कृषि एवं किसान कल्याण विभाग को अपनी आपत्तियों के साथ मुख्यमंत्री के पास नया ज्ञापन भेजने की सिफारिश की। इसका उद्देश्य कैबिनेट से इस मामले पर नया निर्णय लेने का अनुरोध करना है।
वहीं, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग को भी मुख्य सचिव के माध्यम से मुख्यमंत्री को कैबिनेट के पुराने फैसले पर अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी देने के लिए कहा गया है।
किसानों के लिए क्यों अहम है कालकट भवन?
कालकट भवन का नाम प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक डॉ. जीएस कालकट के नाम पर रखा गया है। वर्ष 2016 में बने इस भवन की कल्पना ऐसे केंद्र के रूप में की गई थी, जहां किसान, कृषि विशेषज्ञ और नीति निर्माता मिलकर खेती से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर सकें। इसका उद्देश्य किसानों तक आधुनिक तकनीक और नई कृषि पद्धतियों की जानकारी पहुंचाना भी था।
इसी वजह से किसान संगठन इस भवन को केवल सरकारी संपत्ति नहीं, बल्कि किसानों से जुड़े संस्थानों और गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण स्थान मानते हैं।
फिलहाल, कालकट भवन के हस्तांतरण पर अंतिम फैसला होना बाकी है। अब मुख्यमंत्री को भेजे जाने वाले ज्ञापन और कैबिनेट के अगले निर्णय पर नजर रहेगी।
