27 जून 2026 : पंजाब में नशीले पदार्थों की तस्करी को लेकर एक बड़ी जानकारी सामने आई है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में जब्त की गई कुल हेरोइन में से लगभग 58 प्रतिशत हिस्सा पंजाब से बरामद किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में भारत में कुल 3,567 किलोग्राम हेरोइन जब्त की गई, जिसमें से 2,086 किलोग्राम अकेले पंजाब में पकड़ी गई।
NCB की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत-पाकिस्तान सीमा, खासकर पंजाब सेक्टर, ड्रग तस्करी के लिए एक प्रमुख चुनौती बना हुआ है। तस्करी नेटवर्क अब पुराने तरीकों के साथ-साथ नई तकनीकों का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं। इनमें ड्रोन के जरिए प्रतिबंधित सामान पहुंचाने के प्रयास भी शामिल हैं।
सीमा पार नेटवर्क पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर
पंजाब की भौगोलिक स्थिति के कारण यह क्षेत्र लंबे समय से सीमा पार से होने वाली तस्करी के लिए संवेदनशील माना जाता है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क भारत में नशीले पदार्थ पहुंचाने के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करते हैं।
NCB रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत-पाक सीमा पर ड्रोन आधारित तस्करी की घटनाओं में बदलाव देखने को मिला है। सख्त जमीनी निगरानी के कारण तस्कर तकनीकी तरीकों की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं।
ड्रग तस्करी के बदलते तरीके
रिपोर्ट के अनुसार, तस्करी करने वाले गिरोह अब आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं। बड़े ड्रोन और अन्य तकनीकी माध्यमों से सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने के प्रयास सामने आए हैं। सुरक्षा एजेंसियां एंटी-ड्रोन सिस्टम, निगरानी उपकरणों और खुफिया नेटवर्क के जरिए इन गतिविधियों पर नजर रख रही हैं।
इसके अलावा पंजाब में फार्मास्युटिकल ड्रग्स के गलत इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई गई है। NCB रिपोर्ट में प्रतिबंधित दवाओं और कफ सिरप की अवैध आपूर्ति को एक बढ़ती समस्या बताया गया है।
सरकार और एजेंसियों की कार्रवाई
नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई के तहत सुरक्षा और जांच एजेंसियां लगातार अभियान चला रही हैं। इसमें तस्करी नेटवर्क की पहचान, अवैध गतिविधियों पर निगरानी और जब्ती की कार्रवाई शामिल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल जब्ती से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि तस्करी के पूरे नेटवर्क को खत्म करने के लिए बेहतर समन्वय और तकनीकी निगरानी जरूरी है।
युवाओं और समाज पर प्रभाव
ड्रग तस्करी का असर केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सामाजिक प्रभाव भी पड़ता है। नशीले पदार्थों की उपलब्धता युवाओं, परिवारों और समुदायों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन सकती है।
पंजाब में लंबे समय से नशे के खिलाफ जागरूकता और रोकथाम अभियान चलाए जा रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां और प्रशासन नशीले पदार्थों की सप्लाई रोकने के साथ-साथ इसके सामाजिक प्रभावों को कम करने पर भी ध्यान दे रहे हैं।
आगे की चुनौती
NCB की रिपोर्ट से साफ है कि पंजाब अभी भी देश में हेरोइन तस्करी के मामले में सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है। बदलते तस्करी तरीकों के कारण सुरक्षा एजेंसियों को अपनी रणनीति लगातार अपडेट करनी पड़ रही है।
आने वाले समय में सीमा सुरक्षा, तकनीकी निगरानी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए इस चुनौती से निपटना प्रमुख प्राथमिकता बनी रहेगी।
