6 जून 2026 : पंजाब के Faridkot में 784 पेड़ों को काटने के प्रस्ताव को लेकर विवाद गहरा गया है। इस प्रस्ताव के सामने आने के बाद स्थानीय निवासियों, पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है। मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है और क्षेत्र के विधायक के खिलाफ लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है।
जानकारी के अनुसार, विकास कार्यों और बुनियादी ढांचे से जुड़ी एक परियोजना के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों को हटाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। जैसे ही यह जानकारी सार्वजनिक हुई, स्थानीय लोगों ने पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर चिंता व्यक्त करनी शुरू कर दी। उनका कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई से क्षेत्र का पर्यावरण संतुलन प्रभावित होगा और हरित क्षेत्र में भारी कमी आएगी।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि विकास कार्यों के नाम पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं है। उन्होंने प्रशासन से परियोजना की समीक्षा करने और पेड़ों को बचाने के लिए वैकल्पिक योजना तैयार करने की मांग की है। कई लोगों का कहना है कि पेड़ केवल पर्यावरण ही नहीं बल्कि स्थानीय जैव विविधता और लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।
इस मुद्दे को लेकर विधायक की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों को विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाकर निर्णय लेना चाहिए। इसी वजह से विधायक के खिलाफ नाराजगी खुलकर सामने आ रही है।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि पेड़ों की कटाई अपरिहार्य हो तो उसके बदले बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण की स्पष्ट योजना बनाई जानी चाहिए। साथ ही परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव का विस्तृत आकलन भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
दूसरी ओर, परियोजना के समर्थकों का तर्क है कि क्षेत्र के विकास और यातायात सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कुछ कठिन निर्णय लेने पड़ते हैं। हालांकि वे भी पर्यावरण संरक्षण के लिए उचित कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं।
फिलहाल यह मुद्दा फरीदकोट में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और नागरिक संगठनों के बीच संवाद की मांग बढ़ रही है ताकि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलित समाधान निकाला जा सके।
