23 सितंबर 2026: पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), लुधियाना के मृदा विज्ञान विभाग की ओर से होशियारपुर के माहिलपुर ब्लॉक के नौनीतपुर गांव में ‘Balanced Use of Fertilisers’ यानी उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल को लेकर फील्ड डे आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 50 से अधिक किसानों ने हिस्सा लिया। इसका उद्देश्य किसानों को संतुलित और एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन के प्रति जागरूक करना था, ताकि खेती को अधिक टिकाऊ बनाया जा सके और मिट्टी की सेहत को लंबे समय तक बनाए रखा जा सके।
संतुलित खाद के इस्तेमाल पर जोर
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने किसानों को फसलों में उर्वरकों का इस्तेमाल जरूरत के अनुसार करने की सलाह दी। PAU के प्रिंसिपल सॉयल केमिस्ट डॉ. गुरमीत सिंह ढेरी ने जैविक खाद और रासायनिक उर्वरकों के उचित संयोजन पर जोर दिया।
उन्होंने बताया कि जैविक और अकार्बनिक खाद का संतुलित इस्तेमाल मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद कर सकता है। इसके साथ ही इससे फसल उत्पादकता और पोषक तत्वों के उपयोग की क्षमता में सुधार हो सकता है। विशेषज्ञों ने किसानों को लंबे समय तक मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पोषक तत्वों के संतुलित प्रबंधन को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
खाद डालने से पहले मिट्टी की जांच जरूरी
PAU की सॉयल साइंटिस्ट डॉ. गायत्री वर्मा ने किसानों को खाद डालने से पहले मिट्टी की सही तरीके से सैंपलिंग और जांच कराने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मिट्टी की जांच से फसल की पोषक तत्वों की जरूरत का पता लगाने में मदद मिलती है।
इससे किसान आवश्यकता से अधिक उर्वरक डालने से बच सकते हैं और खेती की लागत को भी कम किया जा सकता है। विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी कि केवल अनुमान के आधार पर खाद का इस्तेमाल करने के बजाय मिट्टी की जांच के आधार पर पोषक तत्वों की जरूरत तय की जाए।
KVK की गतिविधियों की भी दी जानकारी
कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) बहोवाल के एसोसिएट डायरेक्टर ट्रेनिंग डॉ. मनिंदर सिंह बोन्स ने किसानों को KVK की विभिन्न गतिविधियों और आने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने किसानों से कृषि से जुड़ी नई तकनीकों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में हिस्सा लेने की अपील की। इसके साथ ही उन्होंने रबी फसलों में एकीकृत कीट प्रबंधन के महत्व के बारे में भी किसानों को जागरूक किया।
रबी फसलों की बेहतर पैदावार पर चर्चा
KVK होशियारपुर के एसोसिएट प्रोफेसर एग्रोनॉमी डॉ. गुरप्रताप सिंह ने रबी फसलों की बेहतर पैदावार के लिए आधुनिक कृषि पद्धतियों पर जानकारी दी।
उन्होंने समय पर कृषि कार्य करने, कृषि inputs के कुशल इस्तेमाल और अनुशंसित फसल प्रबंधन तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया। विशेषज्ञों के अनुसार उचित समय पर किए गए कृषि कार्य और संसाधनों का सही इस्तेमाल फसल की उत्पादकता तथा किसानों की आय से जुड़े परिणामों को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
कई गांवों के किसान हुए शामिल
इस फील्ड डे में नौनीतपुर के अलावा सैदपुर, पुंज, तोलियां और बघौरा गांवों के सरपंच, प्रगतिशील किसान और अन्य प्रतिनिधि भी शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान किसानों ने कृषि, मिट्टी और उर्वरक प्रबंधन से जुड़ी जानकारी विशेषज्ञों से प्राप्त की।
टिकाऊ खेती के लिए मिट्टी की सेहत महत्वपूर्ण
कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि खेती में लगातार अधिक मात्रा में उर्वरकों के इस्तेमाल के बजाय फसल की वास्तविक जरूरत के अनुसार पोषक तत्वों का प्रबंधन करना जरूरी है। मिट्टी की जांच के जरिए किसानों को यह समझने में मदद मिलती है कि खेत में किन पोषक तत्वों की आवश्यकता है।
PAU की ओर से आयोजित इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों से जोड़ने में मदद करते हैं। इसके साथ ही किसानों को नई तकनीकों, कीट प्रबंधन और बेहतर फसल प्रबंधन के बारे में जानकारी मिलती है।
