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पंजाब में किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए मशरूम खेती बनी कमाई का नया जरिया

2 सितंबर 2026  खेती की बढ़ती लागत और किसानों की आय को बढ़ाने की जरूरत के बीच मशरूम की खेती पंजाब के किसानों, ग्रामीण महिलाओं और युवाओं के लिए अतिरिक्त कमाई का एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रही है। कम निवेश, कम जगह और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के कारण इसे खेती के साथ एक सहायक व्यवसाय के रूप में अपनाया जा सकता है। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के Krishi Vigyan Kendra (KVK), बहोवाल, होशियारपुर की ओर से किसानों और ग्रामीण युवाओं को मशरूम उत्पादन की तकनीक सिखाने के लिए लगातार प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

इसी दिशा में PAU-KVK बहोवाल की ओर से 24 से 31 अगस्त तक मशरूम खेती पर पांच दिवसीय व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल किसानों को मशरूम उगाने की तकनीक बताना नहीं था, बल्कि उन्हें इसे एक आय पैदा करने वाले व्यवसाय के रूप में अपनाने के लिए जरूरी जानकारी देना भी था।

कार्यक्रम का उद्घाटन PAU-KVK होशियारपुर के Associate Director (Training) डॉ. मनिंदर सिंह बोंस ने किया। उन्होंने कहा कि KVK का उद्देश्य जरूरत के अनुसार कौशल विकास कार्यक्रमों के जरिए ग्रामीण लोगों की आजीविका को मजबूत करना है।

कम निवेश और कम जगह में शुरू हो सकता है काम

विशेषज्ञों के मुताबिक मशरूम उत्पादन की एक खासियत यह है कि इसे पारंपरिक खेती की तुलना में अपेक्षाकृत कम जगह और सीमित निवेश में शुरू किया जा सकता है। इससे छोटे और सीमांत किसानों के साथ-साथ ऐसे ग्रामीण युवाओं को भी अवसर मिल सकता है, जिनके पास बड़ी कृषि भूमि उपलब्ध नहीं है।

PAU की ओर से भी मशरूम खेती को कम निवेश और कम जगह में किया जाने वाला लाभकारी कृषि व्यवसाय बताया गया है। विश्वविद्यालय के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में किसानों, ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को इस क्षेत्र में तकनीकी जानकारी देकर इसे आय का अतिरिक्त साधन बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

कई प्रकार के मशरूम की दी गई जानकारी

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को अलग-अलग प्रकार के मशरूम की खेती के बारे में जानकारी दी गई। इनमें बटन, ऑयस्टर, मिल्की, शिटाके और पैडी स्ट्रॉ मशरूम शामिल हैं।

Assistant Professor (Vegetable Science) डॉ. कर्मवीर सिंह गर्चा ने तकनीकी सत्रों का संचालन किया। प्रशिक्षण में Spawn Production, Compost Preparation, Cropping Techniques और Crop Management जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी गई।

इस तरह प्रतिभागियों को केवल मशरूम तैयार करने की प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि उत्पादन से जुड़े अलग-अलग चरणों की व्यावहारिक जानकारी भी दी गई।

बीमारी नियंत्रण और मार्केटिंग पर भी जोर

मशरूम खेती में उत्पादन के साथ-साथ फसल को बीमारियों से बचाना, सही तरीके से तैयार करना और बाजार तक पहुंचाना भी महत्वपूर्ण होता है। प्रशिक्षण में Disease Management, Processing, Value Addition और Marketing जैसे विषयों को भी शामिल किया गया।

इससे किसानों और युवाओं को मशरूम उत्पादन की पूरी प्रक्रिया समझने में मदद मिली। प्रशिक्षण का उद्देश्य उन्हें उत्पादन के साथ-साथ पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट और बाजार से जुड़ी जानकारी देना भी था।

सफल किसान के फार्म का कराया गया दौरा

प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत प्रतिभागियों को पड़ोसी शहीद भगत सिंह नगर जिले के बेहराम गांव स्थित Punjab Mushroom Farm का Exposure Visit भी कराया गया।

यह फार्म सफल मशरूम उत्पादक और पूर्व KVK प्रशिक्षु रोहित पाडन द्वारा संचालित किया जाता है। उन्होंने प्रशिक्षण में शामिल किसानों और ग्रामीण युवाओं के साथ अपने उद्यम की यात्रा साझा की।

रोहित पाडन ने मशरूम उत्पादन को व्यावसायिक स्तर पर स्थापित करने के दौरान सामने आई चुनौतियों और उनसे निपटने के तरीकों के बारे में भी प्रतिभागियों को जानकारी दी। इससे प्रशिक्षण लेने वाले लोगों को यह समझने का अवसर मिला कि मशरूम खेती को छोटे स्तर से शुरू करके किस तरह एक ग्रामीण व्यवसाय के रूप में विकसित किया जा सकता है।

पंजाब में पहले भी सामने आए हैं सफल उदाहरण

पंजाब में मशरूम खेती से किसानों की आय बढ़ने के उदाहरण पहले भी सामने आए हैं। PAU से जुड़े एक Farmer FIRST कार्यक्रम में पंजाब के संगरूर जिले के गांवों में किसानों को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया गया था। इस कार्यक्रम में कई परिवारों ने बटन मशरूम की खेती शुरू की और इससे आय अर्जित की।

वहीं, अगस्त 2026 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब के दो भाइयों ने दशकों पहले लगभग ₹10,000 के निवेश और 10 क्विंटल धान के पुआल से शुरू किए गए मशरूम कारोबार को करोड़ों रुपये के सालाना व्यवसाय में बदल दिया। उनका उद्यम अब मशरूम उत्पादन के साथ Spawn Production, Packing, Marketing और Farmer Training से भी जुड़ा है।

ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार का अवसर

मशरूम खेती केवल किसानों की अतिरिक्त आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है। ग्रामीण युवाओं के लिए यह स्वरोजगार और रोजगार पैदा करने वाला क्षेत्र भी बन सकता है।

मशरूम उत्पादन के साथ Spawn Production, Processing, Packaging और Marketing जैसी गतिविधियों में भी काम के अवसर पैदा हो सकते हैं। PAU के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भी इस बात पर जोर दिया जाता रहा है कि मशरूम खेती भूमि की सीमित उपलब्धता वाले छोटे किसानों और बेरोजगार युवाओं के लिए आय का विकल्प बन सकती है।

प्रशिक्षण से बढ़ेगा आत्मविश्वास

PAU-KVK की ओर से आयोजित ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण लोगों को वैज्ञानिक तरीके से मशरूम उत्पादन करने में मदद करते हैं। इससे किसान पारंपरिक फसलों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय अपनी आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित कर सकते हैं।

हालांकि, मशरूम खेती शुरू करने से पहले सही तकनीक, बाजार की मांग, उत्पादन लागत, तापमान और नमी नियंत्रण तथा मार्केटिंग की जानकारी होना जरूरी है। इसलिए विशेषज्ञ प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन को महत्वपूर्ण मानते हैं।

खेती के साथ अतिरिक्त व्यवसाय का विकल्प

बढ़ती कृषि लागत और बदलते बाजार के दौर में किसानों के लिए आय के वैकल्पिक स्रोत विकसित करना जरूरी हो गया है। ऐसे में मशरूम खेती एक ऐसी गतिविधि हो सकती है जिसे उपलब्ध संसाधनों के अनुसार खेती के साथ जोड़ा जा सकता है।

PAU-KVK का जोर भी ग्रामीण समुदायों को व्यावहारिक कौशल देकर कृषि आधारित आजीविका में विविधता लाने पर है। इससे किसानों, ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को स्थानीय स्तर पर आय और रोजगार के नए अवसर तलाशने में मदद मिल सकती है।

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