2 सितंबर 2026 जालंधर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने मंजूर किए जा चुके मोटर इंश्योरेंस क्लेम की राशि लंबे समय तक रोके रखने पर Oriental Insurance Company को फटकार लगाई है। आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी बीमा कंपनी को केवल लंबित औपचारिकताओं का हवाला देकर उपभोक्ता की मंजूर राशि को अनिश्चित समय तक रोककर रखने का अधिकार नहीं है।
आयोग ने बीमा कंपनी को ₹5.62 लाख की मंजूर क्लेम राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ जारी करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा शिकायतकर्ता को मानसिक परेशानी और मुकदमेबाजी खर्च के लिए ₹30,000 का भुगतान करने का भी आदेश दिया गया है।
सितंबर 2024 में हुआ था कार का हादसा
यह मामला जालंधर निवासी गगनदीप सिंह से जुड़ा है। उनकी कार 19 सितंबर 2024 को गोराया के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। हादसे में कार को इतना नुकसान हुआ कि उसे पूरी तरह क्षतिग्रस्त यानी Total Loss माना गया।
गगनदीप सिंह की कार का बीमा Oriental Insurance Company के पास था और वाहन की घोषित बीमित राशि ₹7 लाख थी। हादसे के बाद बीमा कंपनी ने नुकसान का आकलन करने के लिए पहले Spot Surveyor और बाद में Final Surveyor नियुक्त किया।
सर्वेयर ने ₹5.62 लाख का नुकसान आंका
वाहन की जांच के बाद Final Surveyor ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि कार की मरम्मत आर्थिक रूप से व्यवहारिक नहीं थी। इसलिए इसे Total Loss के आधार पर निपटाने की सिफारिश की गई।
सर्वेयर ने वाहन के नुकसान की राशि ₹5.62 लाख आंकी। इसके बाद बीमा कंपनी ने भी इसी राशि के क्लेम को मंजूरी दे दी। हालांकि, मंजूरी मिलने के बावजूद गगनदीप सिंह को राशि का भुगतान नहीं किया गया।
औपचारिकताओं के नाम पर रोकी गई राशि
क्लेम का भुगतान नहीं होने पर मामला उपभोक्ता आयोग के सामने पहुंचा। बीमा कंपनी ने आयोग के समक्ष दलील दी कि शिकायतकर्ता से कुछ औपचारिकताएं पूरी करने और जरूरी दस्तावेज जमा करने को कहा गया था। कंपनी के अनुसार, इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही क्लेम राशि जारी की जानी थी।
हालांकि, आयोग बीमा कंपनी की इस दलील से संतुष्ट नहीं हुआ। आयोग ने माना कि जब कंपनी ने क्लेम को जांच के बाद भुगतान योग्य माना और एक निश्चित राशि को मंजूरी भी दे दी, तो केवल सामान्य औपचारिकताओं का हवाला देकर उस राशि को अनिश्चितकाल तक रोककर नहीं रखा जा सकता।
Consumer Commission ने दिया स्पष्ट निर्देश
जालंधर जिला Consumer Commission ने Oriental Insurance Company को ₹5.62 लाख की स्वीकृत राशि 6 प्रतिशत ब्याज के साथ जारी करने का आदेश दिया। साथ ही शिकायतकर्ता को मानसिक उत्पीड़न और मुकदमेबाजी खर्च के लिए ₹30,000 देने को कहा गया।
आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि यदि वाहन पर किसी बैंक का कानूनी रूप से वसूली योग्य बकाया है, तो पहले उस बकाया राशि का निपटारा किया जाए और इसके बाद बची हुई क्लेम राशि शिकायतकर्ता को दी जाए।
ICICI Bank का भी था वाहन पर हक
मामले में ICICI Bank की भूमिका भी सामने आई। कार बैंक से वित्तपोषित थी और लोन पूरी तरह चुकाए जाने तक वाहन Hypothecation के तहत था।
आयोग ने इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए निर्देश दिया कि यदि बैंक की कोई कानूनी रूप से वसूली योग्य बकाया राशि है तो पहले उसे चुकाया जाए। इसके बाद ₹5.62 लाख के मुआवजे में से बची रकम गगनदीप सिंह को जारी की जाए।
दस्तावेज जमा करने के लिए 15 दिन का समय
आयोग ने शिकायतकर्ता को आदेश की प्रति मिलने के बाद अपने पास उपलब्ध आवश्यक दस्तावेज 15 दिनों के भीतर जमा करने को कहा है।
इसके बाद बीमा कंपनी को दस्तावेज प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर मंजूर क्लेम राशि जारी करनी होगी। वहीं, मानसिक उत्पीड़न और मुकदमेबाजी खर्च से संबंधित राशि का भुगतान आदेश की प्रति मिलने के 45 दिनों के भीतर करना होगा।
उपभोक्ताओं के अधिकार पर आयोग का संदेश
इस मामले में Consumer Commission का आदेश बीमा क्लेम से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा सकता है। खासकर तब, जब बीमा कंपनी ने खुद सर्वे के बाद नुकसान की राशि तय कर दी हो और क्लेम को मंजूरी भी दे दी हो।
आयोग ने अपने आदेश के जरिए यह स्पष्ट किया कि मंजूर क्लेम को बिना किसी ठोस और पर्याप्त कारण के लंबे समय तक लंबित रखना उपभोक्ता के हितों के खिलाफ हो सकता है। केवल औपचारिकताओं का हवाला देकर भुगतान को अनिश्चित समय तक टालना उचित नहीं माना जा सकता।
