30 अक्तूबर 2026: फाइबर ऑप्टिक्स के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. नरिंदर सिंह कपानी की 100वीं जयंती पर मोगा में कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर उनके वैज्ञानिक योगदान, उपलब्धियों और भारत से जुड़े उनके संबंधों को याद किया गया। डॉ. कपानी को आधुनिक फाइबर ऑप्टिक्स तकनीक के विकास में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए दुनिया भर में पहचाना जाता है।
फाइबर ऑप्टिक्स के विकास में अहम योगदान
डॉ. नरिंदर सिंह कपानी को फाइबर ऑप्टिक्स के क्षेत्र का प्रमुख अग्रदूत माना जाता है। उन्होंने प्रकाश को कांच के बेहद पतले रेशों के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने की तकनीक पर महत्वपूर्ण शोध किया। उनके प्रयोगों और अनुसंधान ने ऑप्टिकल फाइबर के विकास को नई दिशा दी।
आज ऑप्टिकल फाइबर तकनीक का इस्तेमाल इंटरनेट, दूरसंचार, मेडिकल उपकरणों और कई आधुनिक संचार प्रणालियों में किया जाता है। तेज गति से डेटा भेजने और लंबी दूरी तक सूचना पहुंचाने में इस तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका है।
पंजाब की धरती से जुड़ा रहा जीवन
डॉ. नरिंदर सिंह कपानी का जन्म 31 अक्टूबर 1926 को पंजाब के मोगा में हुआ था। बचपन से ही विज्ञान और तकनीक में रुचि रखने वाले कपानी ने आगे चलकर भौतिकी और प्रकाश विज्ञान के क्षेत्र में शोध किया। उन्होंने भारत में अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उच्च शिक्षा और अनुसंधान के लिए विदेश का रुख किया।
उन्होंने लंदन के इंपीरियल कॉलेज में प्रकाशिकी के क्षेत्र में शोध किया और बाद में अमेरिका में वैज्ञानिक तथा शिक्षाविद के रूप में काम किया। उनकी वैज्ञानिक यात्रा ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।
दुनिया भर में मिली पहचान
डॉ. कपानी को वर्ष 1950 के दशक में ऑप्टिकल फाइबर पर किए गए प्रयोगों और शोध के लिए विशेष पहचान मिली। उन्होंने फाइबर ऑप्टिक्स से जुड़े अनुसंधान को आगे बढ़ाने के साथ इस तकनीक के व्यावहारिक उपयोग की संभावनाओं पर भी काम किया।
विज्ञान की दुनिया में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मानों और पुरस्कारों से नवाजा गया। वर्ष 2021 में उन्हें मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके योगदान की राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता है।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा
डॉ. कपानी की उपलब्धियां विद्यार्थियों और युवा शोधकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उनका जीवन बताता है कि वैज्ञानिक जिज्ञासा, लगातार प्रयोग और मेहनत से ऐसे आविष्कारों की राह खुल सकती है, जिनका प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ता है।
मोगा में उनकी 100वीं जयंती मनाया जाना पंजाब के लिए गौरव का अवसर है। इससे नई पीढ़ी को अपने क्षेत्र से जुड़े महान वैज्ञानिकों और उनके योगदान के बारे में जानने का मौका मिला।
