27 जून 2026 : महाराष्ट्र सरकार ने सिख समुदाय की चिंताओं को देखते हुए तक्ख्त श्री हजूर साहिब, नांदेड़ से जुड़े प्रस्तावित नए कानून के ड्राफ्ट को फिलहाल रोक दिया है। सरकार ने इस मामले में आगे बढ़ने से पहले सिख समुदाय के प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों से चर्चा करने के लिए एक समिति बनाने का निर्णय लिया है।
यह विवाद महाराष्ट्र सरकार के उस प्रस्ताव के बाद शुरू हुआ था जिसमें पुराने नांदेड़ सिख गुरुद्वारा सचखंड श्री हजूर अबचलनगर साहिब एक्ट, 1956 को बदलकर नया कानून लाने की बात कही गई थी। इस प्रस्ताव को लेकर कई सिख संगठनों ने चिंता जताई थी और इसे धार्मिक संस्थान के प्रबंधन में हस्तक्षेप के रूप में देखा था।
तक्ख्त श्री हजूर साहिब सिख धर्म के पांच प्रमुख तख्तों में से एक है और इसका ऐतिहासिक महत्व बहुत अधिक है। यह स्थान दसवें सिख गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी के अंतिम समय से जुड़ा हुआ है। इसलिए इसके प्रशासन और प्रबंधन से जुड़े किसी भी बदलाव को लेकर सिख समुदाय में विशेष संवेदनशीलता रहती है।
सिख संगठनों ने जताई थी आपत्ति
प्रस्तावित कानून को लेकर कई सिख संगठनों और नेताओं ने आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि तक्ख्त की धार्मिक और प्रशासनिक स्वायत्तता को बनाए रखना जरूरी है। कुछ संगठनों ने सरकार से अपील की थी कि किसी भी बदलाव से पहले सिख समुदाय से व्यापक विचार-विमर्श किया जाए।
इस मुद्दे पर चर्चा के बाद महाराष्ट्र सरकार ने अपना रुख नरम किया और कहा कि कानून में बदलाव से पहले सभी पक्षों की राय ली जाएगी। सरकार की ओर से समिति बनाने का फैसला इसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
सरकार और समुदाय के बीच संवाद पर जोर
महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने सिख नेताओं के साथ बैठक के बाद इस मामले पर चर्चा और सलाह प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही। बैठक में यह सुझाव दिया गया कि नया कानूनी ढांचा तैयार करने से पहले सिख विद्वानों और समुदाय के प्रतिनिधियों से राय ली जाए।
आगे की प्रक्रिया पर नजर
अब सभी की नजर इस बात पर है कि समिति की चर्चा के बाद महाराष्ट्र सरकार इस कानून को लेकर क्या कदम उठाती है। सिख समुदाय चाहता है कि तक्ख्त श्री हजूर साहिब की धार्मिक पहचान और परंपराओं को ध्यान में रखते हुए कोई भी फैसला लिया जाए।
यह मामला केवल एक कानूनी बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि धार्मिक संस्थानों की स्वायत्तता, परंपरा और प्रशासनिक व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है। आने वाले समय में सरकार और सिख प्रतिनिधियों के बीच बातचीत इस मुद्दे की दिशा तय करेगी।
