31 अक्तूबर 2026: महाराष्ट्र विधान परिषद के पदवीधर निर्वाचन क्षेत्रों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का पुराना दबदबा कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। राज्य के सात पदवीधर निर्वाचन क्षेत्रों में अब पार्टी के पास केवल एक सीट बची है। यह सीट कोंकण पदवीधर निर्वाचन क्षेत्र की है, जहां से निरंजन डावखरे विधायक हैं। खास बात यह है कि डावखरे मूल रूप से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) से जुड़े रहे हैं और बाद में BJP में शामिल हुए थे।
हाल ही में पदवीधर निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव परिणामों के बाद राज्य की राजनीतिक तस्वीर में बदलाव आया है। कभी BJP के पारंपरिक गढ़ माने जाने वाले इन क्षेत्रों में अब कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) और अन्य दलों के प्रतिनिधियों का दबदबा है।
सात में से छह सीटों पर BJP के अलावा दूसरे दलों के विधायक
महाराष्ट्र विधान परिषद में सात पदवीधर निर्वाचन क्षेत्र हैं। मौजूदा राजनीतिक स्थिति में कोंकण को छोड़कर बाकी छह सीटों पर BJP के विधायक नहीं हैं। मुंबई पदवीधर से शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के अनिल परब, नागपुर से कांग्रेस के अभिजीत वंजारी और अमरावती से कांग्रेस के धीरज लिंगाडे प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
नाशिक पदवीधर निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय सत्यजीत तांबे विधायक हैं। वहीं, पुणे से हर्षदा देशमुख-जाधव और छत्रपति संभाजीनगर से प्रतापसिंह पाटील राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रतिनिधि हैं। इस तरह सात में से छह सीटों पर BJP के अलावा दूसरे दलों और निर्दलीय उम्मीदवार का प्रतिनिधित्व है।
हालिया चुनावों में भी BJP को झटके
हाल ही में हुए विधान परिषद के पदवीधर और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनावों में भी BJP को कुछ महत्वपूर्ण सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। नागपुर पदवीधर निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने BJP उम्मीदवार सुधाकर कोहले को हराया।
पुणे पदवीधर सीट पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की हर्षदा देशमुख-जाधव ने जीत दर्ज की। छत्रपति संभाजीनगर पदवीधर निर्वाचन क्षेत्र में भी इसी पार्टी के प्रतापसिंह पाटील ने जीत हासिल की। इन परिणामों ने पदवीधर निर्वाचन क्षेत्रों में BJP की स्थिति को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज कर दी है।
कभी BJP के मजबूत गढ़ माने जाते थे पदवीधर क्षेत्र
महाराष्ट्र के पदवीधर निर्वाचन क्षेत्र लंबे समय तक BJP के मजबूत राजनीतिक आधार माने जाते रहे हैं। नागपुर, पुणे और कोंकण जैसे क्षेत्रों में पार्टी का प्रभाव रहा है। इन निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता पंजीकरण की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है और राजनीतिक दल चुनाव से पहले अधिक से अधिक पात्र मतदाताओं का पंजीकरण कराने की कोशिश करते हैं।
हाल के वर्षों में इन क्षेत्रों में राजनीतिक समीकरण बदले हैं। विपक्षी दलों ने भी मतदाता पंजीकरण और चुनावी अभियान पर ध्यान दिया है। इसके साथ ही उम्मीदवारों की स्थानीय पकड़ और मतदाताओं से संपर्क भी चुनावी नतीजों को प्रभावित करने वाले कारक रहे हैं।
BJP के सामने संगठन मजबूत करने की चुनौती
पदवीधर निर्वाचन क्षेत्रों में कमजोर होती स्थिति BJP के लिए संगठनात्मक समीक्षा का विषय बन गई है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन ने स्वीकार किया है कि पदवीधर चुनावों में पार्टी कुछ क्षेत्रों में कमजोर रही। उन्होंने पुणे में सहयोगी दलों के नेताओं के बयानों के प्रभाव का भी उल्लेख किया और भविष्य में गलतियों को सुधारने की बात कही।
अब इन परिणामों के बाद BJP के सामने मतदाता पंजीकरण, स्थानीय संगठन और उम्मीदवार चयन को लेकर अपनी रणनीति पर दोबारा काम करने की चुनौती है। वहीं, विपक्षी दलों के लिए इन निर्वाचन क्षेत्रों में अपने समर्थन को बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।
