31 अक्तूबर 2026: दिल्ली पुलिस ने संगठित साइबर अपराध नेटवर्क के खिलाफ दो दिवसीय अभियान चलाकर 944 लोगों को गिरफ्तार किया है। 28 और 29 अक्टूबर को चलाए गए इस अभियान का नाम ऑपरेशन CyHawk 6.0 रखा गया था। पुलिस ने इस दौरान 596 नई एफआईआर दर्ज कीं और 432 पुराने मामलों में भी कार्रवाई की। जांच के दायरे में 4,002 साइबर अपराध शिकायतें आईं, जिनमें कथित तौर पर करीब 479.14 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी शामिल है।
इस अभियान में दिल्ली पुलिस के सभी 15 जिलों के साथ क्राइम ब्रांच की साइबर यूनिट और इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट शामिल रही। पुलिस ने साइबर ठगी करने वालों के साथ-साथ उनके लिए बैंक खाते, सिम कार्ड और भुगतान व्यवस्था उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क को भी निशाना बनाया।
4,979 संदिग्धों को जांच के लिए पकड़ा
ऑपरेशन के दौरान राजधानी में कुल 4,979 संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ और सत्यापन किया गया। इनमें से 944 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 788 लोगों के खिलाफ निवारक कार्रवाई करते हुए उन्हें पाबंद किया गया। इसके अलावा 2,081 लोगों को नोटिस जारी किए गए।
पुलिस ने बताया कि अभियान के दौरान कुल 1,032 मामलों में कार्रवाई हुई। इनमें 596 नई एफआईआर, 432 पुराने मामले और चार कलंदरियां शामिल हैं। इस कार्रवाई का उद्देश्य साइबर अपराध से जुड़े संगठित नेटवर्क की पहचान कर उनके संचालन को बाधित करना था।
17 राज्यों और पांच केंद्रशासित प्रदेशों में छापेमारी
साइबर अपराध के कई नेटवर्क अलग-अलग राज्यों में सक्रिय होते हैं और ठगी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले बैंक खाते, सिम कार्ड तथा अन्य संसाधन अलग-अलग स्थानों से उपलब्ध कराए जाते हैं। ऐसे नेटवर्क तक पहुंचने के लिए दिल्ली पुलिस की 283 टीमों ने कम से कम 17 राज्यों और पांच केंद्रशासित प्रदेशों में छापेमारी की।
जांच में दिल्ली के अलावा दूसरे राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से जुड़ी शिकायतें भी सामने आईं। कुल 4,002 शिकायतों में से 727 दिल्ली से और 3,275 अन्य राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों से संबंधित थीं। इन शिकायतों में कथित ठगी की कुल राशि 479.14 करोड़ रुपये बताई गई है।
बैंक खाते और फर्जी सिम उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क निशाने पर
पुलिस की कार्रवाई केवल साइबर ठगी करने वाले लोगों तक सीमित नहीं रही। अभियान में ऐसे लोगों और नेटवर्क की भी जांच की गई, जिन पर ठगों को म्यूल बैंक खाते, फर्जी सिम कार्ड और भुगतान संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने का आरोप है।
इसके अलावा अवैध कॉल सेंटर, ग्राहकों का डेटा कथित तौर पर गलत तरीके से इस्तेमाल करने वाले सेवा एजेंसी कर्मचारी और फर्जी बैंक खाते खुलवाने में मदद करने वाले संदिग्धों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। पुलिस ने निवेश धोखाधड़ी, ऑनलाइन खरीदारी, मैट्रिमोनियल फ्रॉड, फर्जी केवाईसी कॉल, लोन ऐप के जरिए ब्लैकमेलिंग और सरकारी अधिकारियों के नाम पर ठगी जैसे मामलों की जांच की।
मोबाइल फोन, सिम कार्ड और नकदी बरामद
अभियान के दौरान पुलिस ने बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य सामान जब्त किया। इनमें 1,037 मोबाइल फोन, 1,301 सिम कार्ड, 106 लैपटॉप और कंप्यूटर, 397 एटीएम कार्ड, 325 आधार कार्ड और छह सिम बॉक्स शामिल हैं।
इसके अलावा पुलिस ने 37.67 लाख रुपये नकद, 11 कारें और 10 दोपहिया वाहन भी जब्त किए। सोना और क्रिप्टोकरेंसी भी बरामद की गई। पुलिस के अनुसार, सिम बॉक्स का इस्तेमाल बड़ी संख्या में फर्जी कॉल करने के लिए किया जा रहा था।
जांच और ठगी की रकम का पता लगाने की प्रक्रिया जारी
दिल्ली पुलिस ने साइबर अपराध से जुड़े संदिग्ध बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और ठगी के संभावित केंद्रों की पहचान के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) सहित विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म से मिले डेटा का इस्तेमाल किया।
पुलिस के मुताबिक, ऑपरेशन CyHawk के छह चरणों में अब तक 3,300 से अधिक गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। फिलहाल जांच एजेंसियां ठगी की रकम के लेनदेन, विदेश में बैठे कथित संचालकों और अपराध से अर्जित संपत्ति का पता लगाने में जुटी हैं। साथ ही पीड़ितों को उनकी रकम वापस दिलाने के प्रयास भी जारी हैं।
