22 अगस्त 2026 शहर के बुद्ध दरिया को प्रदूषण मुक्त करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद कई स्थानों से अब भी प्रदूषित और अपर्याप्त रूप से ट्रीट किया गया पानी दरिया में पहुंच रहा है। यह मुद्दा बुद्ध दरिया रेजुवनेशन प्रोजेक्ट की 42वीं समीक्षा बैठक में सामने आया।
कई डिस्चार्ज प्वाइंट अब भी चिंता का कारण
राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में नगर निगम, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB), पंजाब वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड और पुलिस के अधिकारी शामिल हुए।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि बुद्ध दरिया में पानी छोड़ने वाले सभी प्वाइंट्स की लगातार निगरानी की जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
कई जगह प्रदूषण स्तर निर्धारित सीमा से ज्यादा
आधिकारिक निगरानी के दौरान कुछ स्थानों पर प्रदूषण का स्तर निर्धारित मानकों से ऊपर पाया गया। अक्टूबर 2025 में हैबोवाल डेयरी कॉम्प्लेक्स के नीचे BOD 90 mg/l और COD 280 mg/l दर्ज किया गया था।
वहीं, जमालपुर STP के डाउनस्ट्रीम में BOD 24 mg/l और 40 MLD तथा 50 MLD CETP के पास क्रमशः BOD 23 mg/l और COD 100 mg/l दर्ज किया गया।
डेयरी वेस्ट भी बड़ी समस्या
बुद्ध दरिया में प्रदूषण का एक कारण डेयरी वेस्ट भी है। अधिकारियों के अनुसार कई स्थानों पर गोबर, डेयरी का गंदा पानी और ओवरफ्लो होता सीवेज दरिया में पहुंच रहा है।
सीचेवाल ने कहा कि सरकार ने हैबोवाल और ताजपुर रोड स्थित डेयरी कॉम्प्लेक्स से गोबर उठाने के लिए ठेकेदार नियुक्त किया है। ऐसे में गोबर को दरिया में डालने का कोई औचित्य नहीं है।
पहले भी सामने आ चुकी हैं लापरवाही
बुद्ध दरिया की 41वीं समीक्षा बैठक में भी कई कमियां सामने आई थीं। गऊ घाट साहिब के पास प्रदूषित पानी उठाने के लिए लगाए गए पंप करीब 20 दिनों से बंद पाए गए थे। ताजपुर डेयरी कॉम्प्लेक्स के पास बने अस्थायी तालाब से करीब तीन सप्ताह तक गोबर नहीं हटाया गया था।
अधिकारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश
सीचेवाल ने अधिकारियों से कहा कि सफाई अभियान केवल बैठकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जमीन पर भी इसके परिणाम दिखाई देने चाहिए। उन्होंने नगर निगम, PPCB और पुलिस को मिलकर प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
बुद्ध दरिया आगे जाकर सतलुज नदी में मिलता है, इसलिए यहां का प्रदूषण केवल लुधियाना तक सीमित नहीं रहता, बल्कि downstream क्षेत्रों पर भी इसका असर पड़ सकता है।
रेजुवनेशन प्रोजेक्ट के बावजूद चुनौती बरकरार
बुद्ध दरिया को साफ करने और उसमें प्रदूषित पानी का प्रवाह रोकने के लिए लंबे समय से प्रयास चल रहे हैं। वर्ष 2021 में भी दरिया में प्रतिदिन 200 क्यूसेक साफ पानी छोड़ने की परियोजना शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य प्रदूषण कम करना और जलधारा को पुनर्जीवित करना था।
हालांकि, ताजा समीक्षा से स्पष्ट है कि प्रदूषण के स्रोतों पर प्रभावी रोक लगाना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
कुल मिलाकर, बुद्ध दरिया की सफाई के लिए चल रहे प्रयासों के बावजूद कई जगहों से प्रदूषित पानी, डेयरी वेस्ट और सीवेज का डिस्चार्ज जारी है। अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रदूषण के स्रोतों को पूरी तरह रोकना और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई करना है।
