22 अगस्त 2026 पंजाब के पूर्व स्पेशल चीफ सेक्रेटरी करण बीर सिंह सिद्धू ने केंद्र सरकार से सिंधु जल संधि, 1960 को स्थायी रूप से खत्म करने के लिए संसद में कानून बनाने की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर अपनी ओर से प्रस्तावित कानून का मसौदा भी भेजा है।
संधि को स्थायी कानूनी आधार देने की मांग
करण बीर सिंह सिद्धू ने कहा कि केंद्र सरकार ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को फिलहाल स्थगित रखने का फैसला किया था। उनके अनुसार, केवल कार्यकारी आदेश के जरिए संधि को स्थगित रखने के बजाय इसे संसद के कानून के जरिए स्थायी कानूनी आधार दिया जाना चाहिए।
उनका तर्क है कि कार्यकारी स्तर पर लिया गया फैसला भविष्य में किसी अन्य कार्यकारी फैसले से बदला जा सकता है, जबकि संसद से पारित कानून अधिक मजबूत कानूनी और संस्थागत व्यवस्था उपलब्ध कराएगा।
पश्चिमी नदियों के विकास के लिए प्राधिकरण का प्रस्ताव
सिद्धू ने ‘Indus Waters Treaty (Abrogation) and Western Rivers Development Authority Bill, 2026’ का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत एक वैधानिक प्राधिकरण बनाने की बात कही गई है, जो पश्चिमी नदियों के विकास और उन्हें पूर्वी नदियों से जोड़ने की योजना तैयार और लागू कर सके।
प्रस्तावित प्राधिकरण को सिंधु, झेलम और चिनाब जैसी पश्चिमी नदियों के साथ रावी और ब्यास के बीच जल विकास और इंटरलिंकिंग की जिम्मेदारी देने का सुझाव दिया गया है।
भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड की तर्ज पर अथॉरिटी
पूर्व अधिकारी ने प्रस्तावित अथॉरिटी को भाखड़ा-ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) की तर्ज पर बनाने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि BBMB लंबे समय से पूर्वी नदियों के प्रबंधन में भूमिका निभाता रहा है और इसी तरह पश्चिमी नदियों के लिए भी संस्थागत व्यवस्था बनाई जा सकती है।
चिनाब-ब्यास लिंक का भी दिया उदाहरण
सिद्धू ने केंद्र सरकार के चिनाब-ब्यास लिंक टनल प्रोजेक्ट का भी उल्लेख किया। मई 2026 में इस परियोजना को मंजूरी मिलने की बात कहते हुए उन्होंने इसे नदी जोड़ने की दिशा में एक व्यावहारिक उदाहरण बताया है।
उनके अनुसार, करीब 8.7 किलोमीटर लंबी सुरंग के जरिए चिनाब के पानी को ब्यास प्रणाली में लाने की योजना है।
अमित शाह के नदी जोड़ने के बयान का हवाला
सिद्धू ने अमित शाह के हालिया ब्रह्मपुत्र से कावेरी तक नदियों को जोड़ने के आह्वान का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि सरकार की नदी जोड़ने की नीति का तत्काल इस्तेमाल सिंधु बेसिन में भी किया जा सकता है।
कौन हैं करण बीर सिंह सिद्धू?
करण बीर सिंह सिद्धू 1984 बैच के IAS अधिकारी रहे हैं। उन्होंने पंजाब में दो बार वित्तीय आयुक्त (राजस्व) और प्रधान सचिव (सिंचाई) के रूप में काम किया। वह जुलाई 2021 में स्पेशल चीफ सेक्रेटरी के पद से सेवानिवृत्त हुए थे।
कुल मिलाकर, पूर्व पंजाब स्पेशल चीफ सेक्रेटरी ने केंद्र से सिंधु जल संधि को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए संसद में कानून लाने और पश्चिमी नदियों के विकास के लिए एक वैधानिक प्राधिकरण बनाने की मांग की है।
