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पंजाब में बढ़ी किन्नू पौधों की मांग, किसान तेजी से बढ़ा रहे बाग

15 सितंबर, 2026 पंजाब में किन्नू की खेती को लेकर किसानों का रुझान एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। राज्य के प्रमुख फल उत्पादक क्षेत्रों में किसान नए किन्नू बाग लगाने और पुराने बागों का विस्तार करने पर जोर दे रहे हैं। बढ़ती मांग का असर किन्नू के पौधों की कीमतों पर भी पड़ा है और नर्सरियों में अच्छे पौधों की मांग बढ़ने की बात सामने आ रही है।

किन्नू पंजाब की प्रमुख फल फसलों में शामिल है। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के अनुसार 2023-24 में राज्य में फल फसलों के कुल क्षेत्रफल में किन्नू की हिस्सेदारी करीब 48 प्रतिशत थी, जबकि कुल फल उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी लगभग 57 प्रतिशत रही। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पंजाब की बागवानी अर्थव्यवस्था में किन्नू का कितना महत्वपूर्ण स्थान है।

किसानों का किन्नू बागों की ओर बढ़ता रुझान

पंजाब के अबोहर, फाजिल्का, मुक्तसर और होशियारपुर सहित कई क्षेत्रों में किन्नू की खेती की जाती है। अबोहर और फाजिल्का को राज्य के प्रमुख किन्नू बेल्ट के रूप में जाना जाता है। यहां बड़ी संख्या में किसान लंबे समय से किन्नू के बागों पर निर्भर हैं।

हाल के वर्षों में किन्नू की खेती में किसानों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। कभी उत्पादन अधिक होने के कारण कीमतों में गिरावट आई तो कभी मौसम, सिंचाई और बागों में बीमारियों जैसी समस्याओं ने किसानों की चिंता बढ़ाई। इसके बावजूद कुछ क्षेत्रों में बेहतर बाजार भाव और बागवानी से होने वाली संभावित आय ने किसानों को नए बाग लगाने के लिए प्रोत्साहित किया है।

पौधों की बढ़ी मांग से नर्सरियों में हलचल

नए बाग लगाने के लिए किसानों को बड़ी संख्या में प्रमाणित और अच्छी गुणवत्ता वाले पौधों की जरूरत होती है। ऐसे में किन्नू के पौधों की मांग बढ़ने का सीधा असर नर्सरी कारोबार पर पड़ता है।

राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के नर्सरी पोर्टल पर अगस्त 2026 में किन्नू पौधों की खरीद से जुड़ी मांगें भी दिखाई गईं। इनमें एक खरीदार ने 4 एकड़ के लिए 500 पौधों की मांग की, जबकि दूसरी मांग 3 एकड़ के लिए 600 पौधों की थी। इससे नए बाग लगाने में किसानों की सक्रिय रुचि का संकेत मिलता है।

किन्नू की खेती में लंबे समय का निवेश

किन्नू का बाग लगाना सामान्य मौसमी फसल की तरह नहीं है। किसानों को शुरुआती वर्षों में पौधों, सिंचाई, खाद, दवाइयों, श्रम और देखभाल पर खर्च करना पड़ता है। पेड़ों को फल देने में भी कई साल लगते हैं।

एक कृषि अध्ययन के अनुसार किन्नू के पेड़ शुरुआती वर्षों में उत्पादन नहीं देते और इसके बाद उत्पादन धीरे-धीरे बढ़ता है। इसलिए किसान बाग लगाने से पहले लंबे समय के निवेश और बाजार की स्थिति को ध्यान में रखते हैं।

बाजार भाव बढ़ने से किसानों को उम्मीद

किन्नू की खेती में किसानों की कमाई काफी हद तक बाजार भाव और फल की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। पिछले वर्षों में कई बार बंपर उत्पादन के कारण किसानों को कम कीमत मिली है। 2024 में पंजाब में किन्नू की बंपर फसल के दौरान किसानों को कम दामों की समस्या का सामना करना पड़ा था और कई किसानों ने बागों को हटाने तक का फैसला किया था।

वहीं, हाल के वर्षों में कुछ समय पर बाजार में किन्नू के दाम बेहतर रहने से किसानों को राहत भी मिली है। बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद नए किसानों को बागवानी की ओर आकर्षित करने वाले कारणों में शामिल हो सकती है।

अच्छी गुणवत्ता वाले पौधों पर जोर

किन्नू की खेती में पौधे की गुणवत्ता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। सही किस्म, स्वस्थ पौधा और उचित रूटस्टॉक का चयन आगे चलकर उत्पादन और फल की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।

कृषि विशेषज्ञ किसानों को बाग लगाने से पहले विश्वसनीय नर्सरी से पौधे लेने और क्षेत्र के अनुसार उपयुक्त किस्म का चयन करने की सलाह देते हैं। इसके साथ ही मिट्टी, पानी और बाग की जल निकासी जैसी स्थितियों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

PAU की तकनीक से बेहतर उत्पादन की कोशिश

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय लंबे समय से किन्नू की खेती में वैज्ञानिक तकनीकों को बढ़ावा देता रहा है। विश्वविद्यालय की सामग्री में वैज्ञानिक तरीके से बाग प्रबंधन, उचित पोषण, छंटाई और सिंचाई के महत्व पर जोर दिया गया है।

PAU की जानकारी के अनुसार किन्नू की मार्केटिंग भी किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती है। फल जल्दी खराब होने वाला होने के कारण कोल्ड स्टोरेज और प्रसंस्करण सुविधाओं की कमी किसानों के लिए परेशानी पैदा करती है।

किसानों के लिए बाजार और प्रसंस्करण भी जरूरी

सिर्फ उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। किसानों को बेहतर दाम दिलाने के लिए बाजार तक सीधी पहुंच, ग्रेडिंग, पैकिंग, कोल्ड चेन और प्रसंस्करण सुविधाओं का विस्तार भी जरूरी है।

पिछले वर्षों में पंजाब में बंपर उत्पादन के दौरान किसानों को कम कीमतों का सामना करना पड़ा था। ऐसे समय में प्रसंस्करण इकाइयां अतिरिक्त फल को जूस और अन्य उत्पादों में इस्तेमाल कर किसानों को बाजार का विकल्प दे सकती हैं।

बागवानी से फसल विविधीकरण को बढ़ावा

पंजाब में लंबे समय से गेहूं और धान की खेती का दबदबा रहा है। ऐसे में किन्नू जैसी बागवानी फसलें किसानों को फसल विविधीकरण का विकल्प देती हैं। हालांकि, बागवानी में शुरुआती निवेश और लंबी प्रतीक्षा अवधि को देखते हुए किसानों के लिए बाजार, सिंचाई, तकनीकी सलाह और सरकारी सहायता महत्वपूर्ण रहती है।

किन्नू की खेती का विस्तार तभी किसानों के लिए टिकाऊ विकल्प बन सकता है जब उन्हें उत्पादन के साथ-साथ उचित बाजार और बेहतर कीमत की सुविधा भी मिले।

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