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कपूरथला के शिक्षक ने छोड़ी नौकरी, पिता का सपना पूरा करने के लिए शुरू की ड्रैगन फ्रूट खेती

5 अक्टूबर 2026 पंजाब के कपूरथला जिले के भुलत्थ निवासी 27 वर्षीय गुरजोध सिंह ने अपने पिता के लंबे समय से चले आ रहे ऑर्चर्ड के सपने को पूरा करने के लिए नौकरी छोड़कर खेती का रास्ता अपनाया। राजनीतिक विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएट गुरजोध पहले शिक्षक के रूप में काम कर रहे थे और साथ ही सिविल सर्विस की तैयारी भी कर रहे थे। लेकिन पिता राजिंदर सिंह की ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू करने की इच्छा ने उनका रास्ता बदल दिया।

पिता के सपने से शुरू हुई नई राह

गुरजोध के पिता रिटायर्ड हैं और लंबे समय से अपना ऑर्चर्ड शुरू करना चाहते थे। उन्होंने ड्रैगन फ्रूट की खेती को इसलिए चुना क्योंकि उन्हें यह फसल आर्थिक रूप से बेहतर और पारंपरिक फसलों की तुलना में कम पानी की जरूरत वाली लगी।

इसके बाद गुरजोध ने खेती को समझने के लिए शुरुआत में YouTube वीडियो की मदद ली। पिता-पुत्र ने वर्ष 2022 में एक एकड़ जमीन पर ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की। हालांकि पहली कोशिश उनके लिए आसान नहीं रही और करीब 50 फीसदी उत्पादन खराब हो गया।

पहली कोशिश में मिली असफलता

गुरजोध ने बताया कि पहली फसल से शुरुआती फल मिलने में करीब एक साल लग गया। इस दौरान उन्हें मौसम में होने वाले बदलावों और स्वस्थ फल के लिए जरूरी सिंचाई तकनीकों को समझने में परेशानी हुई।

पहले प्रयास में नुकसान के बाद उन्होंने खेती छोड़ने के बजाय विशेषज्ञों से सलाह लेने का फैसला किया। इसी क्रम में उन्होंने पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी यानी PAU का रुख किया, जहां उन्होंने प्रिंसिपल फ्रूट साइंटिस्ट जसविंदर सिंह बराड़ से ड्रैगन फ्रूट की खेती को लेकर जानकारी हासिल की।

KVK कपूरथला से भी ली तकनीकी जानकारी

PAU के बाद गुरजोध ने कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), कपूरथला से भी मार्गदर्शन लिया। यहां उन्होंने खेती से जुड़ी कई तकनीकों के बारे में जानकारी हासिल की।

उन्हें सिंचाई प्रबंधन, फंगल संक्रमण से फसल को बचाने, अत्यधिक गर्मी के दौरान सनबर्न से बचाव और उत्पादकता बढ़ाने के लिए इंटरक्रॉपिंग जैसी तकनीकों की जानकारी मिली। तकनीकी ज्ञान और अनुभव बढ़ने के साथ उन्होंने धीरे-धीरे अपने खेत का विस्तार किया।

अब 6 एकड़ में उगा रहे ‘अमेरिकन ब्यूटी’ किस्म

लगातार सीखने और प्रयोग करने के बाद गुरजोध अब छह एकड़ जमीन पर ड्रैगन फ्रूट की ‘अमेरिकन ब्यूटी’ रेड-फ्लेश किस्म की खेती कर रहे हैं।

उनके मुताबिक इस किस्म का फल गुलाबी रंग का होता है और इसकी शेल्फ लाइफ भी अच्छी है। इसके अलावा इसमें फल के फटने की संभावना कम रहती है और बाजार में भी इसकी मांग और कीमत बेहतर मिलती है।

जालंधर, लुधियाना और चंडीगढ़ में बेच रहे फल

गुरजोध अपनी उपज को जालंधर, लुधियाना और चंडीगढ़ के रिटेल बाजारों में बेच रहे हैं। उन्हें ड्रैगन फ्रूट के लिए करीब ₹150 से ₹200 प्रति किलो तक कीमत मिल रही है।

गुरजोध का कहना है कि ड्रैगन फ्रूट की खेती आर्थिक रूप से व्यवहारिक है और प्रति एकड़ पारंपरिक गेहूं और धान की खेती की तुलना में दो से तीन गुना तक अधिक रिटर्न दे सकती है। यह आंकड़ा उनके अपने खेती अनुभव पर आधारित है।

अब विदेशों में निर्यात का सपना

खेती में सफलता मिलने के बाद गुरजोध अब अपने उत्पाद को घरेलू बाजार से आगे ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। वह भविष्य में ड्रैगन फ्रूट को यूरोप और लैटिन अमेरिका के बाजारों में निर्यात करना चाहते हैं।

उन्होंने अनुमान जताया है कि इन बाजारों में फल को करीब 8 से 9 डॉलर प्रति किलो तक कीमत मिल सकती है। हालांकि यह उनका अनुमान है और वास्तविक कीमत बाजार, गुणवत्ता और निर्यात परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

वैल्यू एडिशन पर भी कर रहे हैं विचार

गुरजोध अब केवल ताजा फल बेचने तक सीमित नहीं रहना चाहते। वह ड्रैगन फ्रूट से बनने वाले दूसरे उत्पादों पर भी काम करने की योजना बना रहे हैं।

उनका कहना है कि दक्षिण भारत के कुछ किसान इस फल से जैम, ड्राइड चिप्स, जेली और जूस जैसे उत्पाद तैयार करते हैं। इसी तरह वह भी प्रोसेसिंग मशीनरी और वैल्यू एडिशन की तकनीक सीखना चाहते हैं, ताकि खेती को आर्थिक रूप से और मजबूत बनाया जा सके।

युवाओं के लिए खेती बना उदाहरण

गुरजोध सिंह की कहानी यह दिखाती है कि खेती को केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित रखने के बजाय नई और हाई-वैल्यू फसलों के साथ भी आगे बढ़ाया जा सकता है। हालांकि ऐसी खेती में बाजार, मौसम, सिंचाई और तकनीकी जानकारी जैसी चुनौतियां भी रहती हैं।

गुरजोध ने पहली असफल कोशिश के बाद विशेषज्ञों से सलाह लेकर अपने तरीके में बदलाव किया और धीरे-धीरे खेती का विस्तार किया। आज छह एकड़ में ड्रैगन फ्रूट की खेती करना उनके लिए एक नए करियर की दिशा बन चुका है।

कुल मिलाकर, कपूरथला के भुलत्थ निवासी गुरजोध सिंह ने अपने पिता राजिंदर सिंह के ऑर्चर्ड के सपने को पूरा करने के लिए शिक्षक की नौकरी छोड़कर ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की। वर्ष 2022 में एक एकड़ से शुरू हुआ उनका सफर अब छह एकड़ तक पहुंच चुका है। PAU और KVK कपूरथला से तकनीकी मार्गदर्शन लेने के बाद वह ‘अमेरिकन ब्यूटी’ किस्म की खेती कर रहे हैं और जालंधर, लुधियाना व चंडीगढ़ के बाजारों में फल बेच रहे हैं।

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