3 जुलाई 2026 : एक महत्वपूर्ण फैसले में हाईकोर्ट ने कहा है कि गृहिणी के काम और परिवार के प्रति उसके योगदान का मूल्य केवल न्यूनतम वेतन के आधार पर नहीं आंका जा सकता। अदालत ने इसी सिद्धांत को लागू करते हुए एक सड़क दुर्घटना मामले में पीड़ित परिवार को मिलने वाले मुआवजे में ₹14.79 लाख की बढ़ोतरी की है।
अदालत ने कहा कि घर संभालने, बच्चों की देखभाल और परिवार के दैनिक जीवन में गृहिणी की भूमिका अमूल्य होती है, इसलिए मुआवजा तय करते समय उसके योगदान का समुचित आकलन किया जाना चाहिए।
मुआवजे की राशि बढ़ाने का आदेश
हाईकोर्ट ने दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) द्वारा तय मुआवजे की समीक्षा करते हुए पीड़ित परिवार को अतिरिक्त ₹14.79 लाख देने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि न्यायपूर्ण और उचित मुआवजा सुनिश्चित करना आवश्यक है।
गृहिणियों के योगदान को मिली कानूनी मान्यता
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि गृहिणियों के कार्य का आर्थिक मूल्यांकन केवल न्यूनतम मजदूरी तक सीमित नहीं होना चाहिए। उनके घरेलू और पारिवारिक योगदान को भी मुआवजे के निर्धारण में उचित महत्व दिया जाना चाहिए।
ऐसे मामलों में बनेगा महत्वपूर्ण उदाहरण
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में सड़क दुर्घटना मुआवजा मामलों में महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है, जहां गृहिणियों के योगदान का मूल्यांकन किया जाएगा।
