3 जुलाई 2026 : एक महत्वपूर्ण फैसले में हाईकोर्ट ने कहा है कि न्याय का उद्देश्य सर्वोपरि है और यदि किसी मामले में उचित एवं न्यायसंगत निर्णय के लिए आवश्यकता हो, तो अदालत किसी भी चरण में अतिरिक्त साक्ष्य (Additional Evidence) स्वीकार करने की अनुमति दे सकती है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायालय का प्रमुख दायित्व सत्य का पता लगाना और निष्पक्ष फैसला देना है। इसलिए, केवल तकनीकी आधार पर ऐसे साक्ष्यों को खारिज नहीं किया जाना चाहिए, यदि वे मामले के सही निस्तारण में सहायक हों।
निष्पक्ष सुनवाई पर दिया जोर
हाईकोर्ट ने कहा कि अतिरिक्त साक्ष्य स्वीकार करने का उद्देश्य किसी पक्ष को अनुचित लाभ देना नहीं, बल्कि न्याय सुनिश्चित करना है। अदालत प्रत्येक मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर इस अधिकार का प्रयोग करेगी।
हर मामले में परिस्थितियों के अनुसार होगा निर्णय
अदालत ने स्पष्ट किया कि अतिरिक्त साक्ष्य की अनुमति स्वतः नहीं मिलेगी। संबंधित पक्ष को यह संतुष्ट करना होगा कि ऐसे साक्ष्य न्यायहित में आवश्यक हैं और उनसे मामले के निष्पक्ष निपटारे में सहायता मिलेगी।
कानूनी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण टिप्पणी
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट की यह टिप्पणी भविष्य में ऐसे मामलों के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन का काम करेगी, जहां न्याय के हित में अतिरिक्त साक्ष्यों की आवश्यकता महसूस की जाती है।
