24 जुलाई 2026 : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने ज़ीरकपुर-पंचकूला बाइपास परियोजना को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को पूरे प्रस्तावित मार्ग का दोबारा सर्वे (Re-survey) कराने और सभी संभावित विकल्पों का व्यापक अध्ययन करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि किसी भी अंतिम निर्णय से पहले सार्वजनिक हित, पर्यावरणीय प्रभाव और प्रभावित लोगों की चिंताओं का समुचित मूल्यांकन किया जाना आवश्यक है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के समक्ष परियोजना के प्रस्तावित रूट को लेकर विभिन्न पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि मौजूदा प्रस्तावित मार्ग से बड़ी संख्या में लोगों, आवासीय क्षेत्रों और संपत्तियों पर असर पड़ सकता है। इस पर अदालत ने कहा कि परियोजना के हर पहलू की निष्पक्ष समीक्षा की जानी चाहिए।
सभी वैकल्पिक मार्गों का होगा मूल्यांकन
हाईकोर्ट ने NHAI को निर्देश दिया कि वह केवल मौजूदा प्रस्ताव तक सीमित न रहे, बल्कि सभी संभावित वैकल्पिक रूटों की तकनीकी, आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टि से व्यवहार्यता का अध्ययन करे। अदालत ने कहा कि ऐसा समाधान तलाशा जाए जिससे ट्रैफिक समस्या का समाधान भी हो और प्रभावित लोगों पर न्यूनतम असर पड़े।
प्रभावित लोगों की चिंताओं पर भी होगा विचार
अदालत ने स्पष्ट किया कि विकास परियोजनाओं के साथ नागरिकों के अधिकारों और उचित प्रक्रिया का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। इसलिए पुनः सर्वेक्षण के दौरान स्थानीय निवासियों और अन्य हितधारकों की आपत्तियों एवं सुझावों पर भी विचार किया जाए।
विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने NHAI को निर्देश दिया कि दोबारा सर्वे के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर अदालत में पेश की जाए। रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाए कि किन-किन विकल्पों पर विचार किया गया, उनके लाभ-हानि क्या हैं और किस आधार पर अंतिम मार्ग का चयन प्रस्तावित किया गया।
ट्रैफिक जाम कम करने की अहम परियोजना
ज़ीरकपुर-पंचकूला बाइपास परियोजना को क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे ट्रैफिक दबाव को कम करने के उद्देश्य से प्रस्तावित किया गया है। यह मार्ग पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के बीच आवागमन को सुगम बनाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद परियोजना की आगे की प्रक्रिया नए सर्वे और तकनीकी मूल्यांकन के आधार पर आगे बढ़ेगी।
