7 अगस्त, 2026 : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चिल्ड्रन कोर्ट और POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम) अदालतों को निर्देश दिया है कि वे मामलों की सुनवाई के दौरान किशोर न्याय (Juvenile Justice) अधिनियम के तहत निर्धारित सभी सुरक्षा प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।
अदालत ने कहा कि बच्चों से जुड़े मामलों में न्यायिक प्रक्रिया के दौरान उनके अधिकारों, गोपनीयता और गरिमा की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। संबंधित अदालतों को कानून में निर्धारित प्रक्रियाओं का अक्षरशः पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बाल पीड़ितों और किशोरों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता के साथ सुनवाई की जानी चाहिए। न्यायिक प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही से बच्चों के हित प्रभावित नहीं होने चाहिए।
कानून के प्रावधानों का पालन अनिवार्य
अदालत ने कहा कि किशोर न्याय अधिनियम और POCSO कानून में दिए गए सुरक्षा उपायों का पालन सभी संबंधित अदालतों और अधिकारियों द्वारा अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए।
न्यायिक प्रक्रिया को संवेदनशील बनाने पर बल
हाईकोर्ट ने कहा कि बच्चों से जुड़े मामलों की सुनवाई करते समय न्यायिक अधिकारियों को बाल हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि पीड़ितों और किशोरों को सुरक्षित एवं न्यायसंगत वातावरण मिल सके।
