31 अगस्त 2026 : हरियाणा सरकार ने वर्ष 2020 में बनाए गए फिजियोथेरेपी काउंसिल अधिनियम को निरस्त करने की तैयारी की है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत इस अधिनियम के तहत पहले किए गए पंजीकरण, नियुक्तियां और अन्य कानूनी या प्रशासनिक कार्रवाइयों की वैधता बनी रहेगी।
2020 के अधिनियम को किया जाएगा निरस्त
हरियाणा सरकार की ओर से 2020 में लागू किए गए फिजियोथेरेपी काउंसिल अधिनियम को समाप्त करने का फैसला लिया गया है। इसके लिए संबंधित कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
अधिनियम को निरस्त करने के बाद फिजियोथेरेपी पेशे से जुड़े नियमन और पंजीकरण की व्यवस्था में बदलाव हो सकता है।
पुराने पंजीकरण रहेंगे मान्य
अधिनियम खत्म होने के बावजूद इसके तहत पहले से किए गए पंजीकरणों को अमान्य नहीं किया जाएगा। जिन फिजियोथेरेपिस्टों का पंजीकरण मौजूदा कानून के तहत हुआ है, उनकी मान्यता को सुरक्षित रखने का प्रावधान किया गया है।
इससे पहले से पंजीकृत पेशेवरों पर अचानक कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ने से बचाया जा सकेगा।
पहले की गई कार्रवाई भी रहेगी वैध
अधिनियम के तहत पहले जारी किए गए आदेशों और की गई प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाइयों को भी वैध माना जाएगा। केवल अधिनियम के निरस्त होने से पहले की कार्रवाई स्वतः समाप्त नहीं होगी।
इसका उद्देश्य पुराने मामलों और प्रक्रियाओं में कानूनी असमंजस की स्थिति पैदा होने से रोकना है।
फिजियोथेरेपिस्टों पर क्या होगा असर?
अधिनियम के निरस्त होने के बाद फिजियोथेरेपिस्टों के पंजीकरण और पेशे के नियमन के लिए लागू होने वाली नई व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी। सरकार की ओर से आगे संबंधित नियमों और प्रक्रियाओं को स्पष्ट किया जा सकता है।
मौजूदा पंजीकृत फिजियोथेरेपिस्टों के हितों को सुरक्षित रखने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
कानूनी व्यवस्था में बदलाव
किसी कानून को निरस्त करते समय उससे जुड़े पुराने अधिकारों, दायित्वों और कार्रवाइयों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक प्रावधान किए जाते हैं। हरियाणा में भी प्रस्तावित निरस्तीकरण के साथ पुराने पंजीकरण और कार्रवाई को सुरक्षित रखने की व्यवस्था की जा रही है।
कुल मिलाकर, हरियाणा सरकार 2020 के फिजियोथेरेपी काउंसिल अधिनियम को निरस्त करने जा रही है। हालांकि, इस कानून के तहत पहले किए गए पंजीकरण और की गई कार्रवाइयों की वैधता बनी रहेगी। अब अधिनियम के बाद फिजियोथेरेपी पेशे के नियमन की नई व्यवस्था पर नजर रहेगी।
