8 जून 2026 : Nayab Singh Saini ने घोषणा की है कि हरियाणा सरकार अगले वर्ष पंचायती भूमि पर प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए नई नीति लेकर आएगी। इस पहल का उद्देश्य टिकाऊ कृषि को प्रोत्साहित करना, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करना और किसानों की आय बढ़ाने के नए अवसर पैदा करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक और जैविक खेती आज के समय की आवश्यकता बनती जा रही है। उपभोक्ताओं के बीच जैविक उत्पादों की मांग बढ़ रही है और पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से भी ऐसी खेती को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार पंचायती भूमि के बेहतर उपयोग के लिए नीति तैयार कर रही है।
नई नीति के तहत ग्राम पंचायतों की भूमि पर प्राकृतिक खेती के मॉडल विकसित किए जा सकते हैं। इससे किसानों, स्वयं सहायता समूहों और कृषि से जुड़े युवाओं को नई तकनीकों और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने का अवसर मिलेगा। सरकार का लक्ष्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा देना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक खेती से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, जल संरक्षण और उत्पादन लागत कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही रासायनिक अवशेषों से मुक्त कृषि उत्पादों की उपलब्धता भी बढ़ेगी, जिससे उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार कृषि क्षेत्र में नवाचार और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। प्राकृतिक और जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए प्रशिक्षण, जागरूकता और तकनीकी सहायता जैसे पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाएगा।
ग्रामीण विकास और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों ने इस प्रस्तावित नीति का स्वागत किया है। उनका मानना है कि यदि पंचायती भूमि का उपयोग वैज्ञानिक और योजनाबद्ध तरीके से किया गया तो यह किसानों और स्थानीय समुदायों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।
हरियाणा सरकार की यह पहल कृषि क्षेत्र में स्थायी विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आने वाले महीनों में नीति के प्रारूप और इसके क्रियान्वयन को लेकर और अधिक जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
