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सांसद निधि के इस्तेमाल में हरियाणा के 3 केंद्रीय मंत्री निचले पायदान पर

14 अक्टूबर 2026:  हरियाणा के तीन केंद्रीय मंत्री सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) के तहत विकास कार्यों की सिफारिश करने के मामले में राज्य के 10 लोकसभा सांसदों की सूची में निचले स्थानों पर हैं। इनमें केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर सबसे पीछे हैं, जबकि राव इंद्रजीत सिंह नौवें और कृष्ण पाल गुर्जर आठवें स्थान पर हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इन सांसदों ने अपने निर्धारित फंड के मुकाबले विकास कार्यों के लिए अपेक्षाकृत कम राशि की सिफारिश की है।

14 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, करनाल से सांसद और केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 14.70 करोड़ रुपये के आवंटन में से 3.05 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सिफारिश की है। यह उनके आवंटित फंड का 20.76 प्रतिशत है। इस आधार पर वह हरियाणा के 10 लोकसभा सांसदों में सबसे निचले स्थान पर हैं। हालांकि, उनके प्रतिनिधि ने बताया कि करनाल जिले में 4.22 करोड़ रुपये की लागत वाले 53 कार्यों की व्यवहार्यता की जांच भी की जा चुकी है और इनके लिए जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।

गुरुग्राम से सांसद राव इंद्रजीत सिंह इस सूची में नौवें स्थान पर हैं। वह केंद्र सरकार में सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन, योजना और संस्कृति से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उनके 14.70 करोड़ रुपये के आवंटन में से 4.79 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सिफारिश की गई है। यह कुल आवंटन का 32.60 प्रतिशत है। उनके प्रतिनिधि प्रशांत पंचाल ने बताया कि हाल ही में करीब चार करोड़ रुपये के कार्यों की सिफारिश की गई है, जबकि कुछ घोषणाओं से संबंधित प्रतिबद्धताओं के लिए लगभग तीन करोड़ रुपये रखे गए हैं।

फरीदाबाद से सांसद और केंद्रीय सहकारिता मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर भी सूची में निचले स्थानों पर हैं। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने अपने 14.70 करोड़ रुपये के आवंटन का 46.18 प्रतिशत इस्तेमाल किया है। इस तरह वह हरियाणा के सांसदों में आठवें स्थान पर हैं। आंकड़े बताते हैं कि सांसद निधि के इस्तेमाल और विकास कार्यों की सिफारिश के मामले में राज्य के सांसदों के बीच काफी अंतर है।

दूसरी ओर, हिसार से कांग्रेस सांसद जय प्रकाश इस सूची में सबसे आगे हैं। चार बार सांसद रह चुके जय प्रकाश ने 14.70 करोड़ रुपये के आवंटन में से 14.64 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सिफारिश की है। यह उनके आवंटन का 99.56 प्रतिशत है। सोनीपत से पहली बार सांसद बने सतपाल ब्रह्मचारी 88.31 प्रतिशत उपयोग के साथ दूसरे स्थान पर हैं। रोहतक से कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा 82.28 प्रतिशत और सिरसा से सांसद कुमारी शैलजा 71.20 प्रतिशत के साथ सूची में आगे रहने वाले अन्य सांसद हैं।

भिवानी-महेंद्रगढ़ से सांसद धर्मबीर सिंह ने 14.70 करोड़ रुपये के आवंटन में से 9.25 करोड़ रुपये के कार्यों की सिफारिश की है। यह राशि उनके आवंटन का 62.93 प्रतिशत है। कुरुक्षेत्र से सांसद नवीन जिंदल ने 8.29 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सिफारिश की है, जो कुल आवंटन का 56.38 प्रतिशत है। अंबाला से कांग्रेस सांसद वरुण चौधरी के मामले में आवंटन अधिक है। उन्हें 25.55 करोड़ रुपये मिले हैं, जिनमें से 12.59 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सिफारिश की गई है। यह 49.28 प्रतिशत के बराबर है।

क्या है सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना?

सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के तहत सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्र में जरूरत के अनुसार विकास कार्यों की सिफारिश कर सकते हैं। इन कार्यों में स्थानीय बुनियादी सुविधाओं, सार्वजनिक उपयोग की संपत्तियों और समुदाय के लिए जरूरी परियोजनाओं को शामिल किया जा सकता है। सांसदों की भूमिका मुख्य रूप से कामों की सिफारिश करने की होती है, जबकि संबंधित जिला प्रशासन और कार्यान्वयन एजेंसियां उनकी व्यवहार्यता, मंजूरी, टेंडर और निर्माण जैसे चरणों की जिम्मेदारी संभालती हैं।

इसलिए फंड के इस्तेमाल से जुड़े आंकड़ों को समझते समय यह अंतर ध्यान में रखना जरूरी है कि किसी कार्य की सिफारिश करना, उसे मंजूरी मिलना और उसका पूरा हो जाना अलग-अलग चरण हैं। सिफारिशों का कम प्रतिशत अपने आप में अनियमितता का प्रमाण नहीं है, लेकिन यह विकास कार्यों की प्रगति और प्रशासनिक प्रक्रिया की समीक्षा का आधार जरूर बन सकता है।

हरियाणा के सांसदों के बीच सामने आया यह अंतर निर्वाचन क्षेत्रों में विकास कार्यों की योजना और क्रियान्वयन को लेकर सवाल खड़े करता है। खासकर उन सांसदों के लिए, जिनके कार्यों की सिफारिश का प्रतिशत कम है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि परियोजनाओं की पहचान, व्यवहार्यता जांच और प्रशासनिक मंजूरी में क्या चुनौतियां आ रही हैं। आने वाले समय में इन कार्यों की मंजूरी और वास्तविक क्रियान्वयन की स्थिति से ही स्पष्ट होगा कि सांसद निधि का लाभ स्थानीय लोगों तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंच रहा है।

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