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हरियाणा की बेटियों ने एशियन गेम्स में रचा इतिहास, संघर्ष और सामाजिक बंदिशों को पीछे छोड़ हासिल की बड़ी कामयाबी

1 अक्टूबर 2026 हरियाणा की दो बेटियों ने 2026 एशियन गेम्स में अपने शानदार प्रदर्शन से देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। सोनीपत की Kiran Pahal और जींद की Neeru Dhanda ने अलग-अलग खेलों में शानदार उपलब्धियां हासिल कीं। दोनों खिलाड़ियों की सफलता के पीछे वर्षों की मेहनत, संघर्ष, चोटों से वापसी और कई सामाजिक चुनौतियों का सामना करने की कहानी है।

Kiran Pahal ने 4×400 मीटर रिले में जीता गोल्ड

सोनीपत की Kiran Pahal भारतीय महिला 4×400 मीटर रिले टीम का हिस्सा रहीं। उन्होंने फाइनल में टीम के लिए शुरुआती लेग दौड़ा और भारत की स्वर्ण पदक जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारतीय टीम ने 4×400 मीटर रिले में गोल्ड मेडल अपने नाम किया।

Kiran का खेल सफर काफी कम उम्र में शुरू हुआ था। उन्होंने अपने गांव Gumad के स्कूल मैदान पर महज 10 साल की उम्र में नंगे पैर दौड़कर अभ्यास शुरू किया था। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने लगातार ट्रेनिंग जारी रखी और धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

सामाजिक बंदिशों के बावजूद जारी रखा खेल

Kiran के सफर में खेल से जुड़ी चुनौतियों के साथ सामाजिक दबाव भी रहा। एक समय गांव के एक व्यक्ति ने उन्हें स्कूल मैदान के पास एक लड़के से बात करते देखा और इसकी जानकारी उनके परिवार को दी। इसके बाद उनके एक रिश्तेदार ने खेल जारी रखने पर आपत्ति जताई और इसे गलत रास्ता बताया।

इन परिस्थितियों में Kiran ने कुछ समय के लिए स्कूल जाने से भी इनकार कर दिया। बाद में उनके पिता Om Prakash ने उनका साथ दिया और उन्हें दोबारा ट्रेनिंग जारी रखने की अनुमति दी। इसके बाद वह रोजाना सोनीपत के Subhash Stadium में अभ्यास के लिए जाती रहीं।

आर्थिक परेशानियों के बीच पिता ने दिया साथ

Kiran के पिता कोर्ट क्लर्क हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह महंगे खेल उपकरण या विशेष डाइट पर आसानी से खर्च कर सके। इसके बावजूद उनके पिता ने बेटी की प्रतिभा को आगे बढ़ाने में पूरा सहयोग किया।

Kiran रोज सुबह ट्रेन से सोनीपत जाती थीं और ट्रेनिंग के बाद दोपहर में वापस अपने घर लौटती थीं। सीमित संसाधनों के बीच इस तरह लगातार अभ्यास करना उनके संघर्ष का अहम हिस्सा रहा।

चोटों ने भी नहीं रोका Kiran का सफर

Kiran को अपने करियर के दौरान कई चोटों का सामना करना पड़ा। पिछले साल उन्हें दोनों घुटनों की सर्जरी करवानी पड़ी थी, जिसके बाद उन्हें लंबे समय तक रिकवरी से गुजरना पड़ा।

इस साल मई में उन्हें कंधे में चोट लगी और इसके लिए उन्हें प्लेटलेट-रिच प्लाज्मा यानी PRP थेरेपी भी करानी पड़ी। इन परेशानियों के बावजूद उन्होंने वापसी की और एशियन गेम्स में भारतीय रिले टीम के साथ स्वर्ण पदक जीतने में योगदान दिया।

Neeru Dhanda ने शूटिंग में जीते तीन पदक

जींद जिले के Sangatpura गांव की Neeru Dhanda ने भी एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने महिलाओं की व्यक्तिगत ट्रैप स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता। इसके अलावा वह ट्रैप मिक्स्ड टीम इवेंट में भी गोल्ड जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहीं। ट्रैप टीम इवेंट में उन्होंने सिल्वर मेडल भी हासिल किया।

Neeru की खास उपलब्धि यह भी रही कि वह एशियन गेम्स में महिलाओं की व्यक्तिगत ट्रैप स्पर्धा में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। उन्होंने इस स्पर्धा में एशियन रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया।

कबड्डी से शुरू हुआ था Neeru का सफर

Neeru ने शुरुआत में कबड्डी खेली थी, लेकिन 19 साल की उम्र में चोट लगने के बाद उन्होंने शूटिंग का रुख किया। शूटिंग जैसे खेल में करियर बनाने के दौरान उन्हें आर्थिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ा।

उनके रिश्तेदार Sombir Sheoran ने भी उन्हें आगे बढ़ने में मदद की। Neeru के पिता Suresh Dhanda शुरुआत में उनके शूटिंग को करियर के रूप में अपनाने को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं थे, लेकिन बाद में Neeru ने अपनी मेहनत और प्रदर्शन से अपनी पहचान बनाई।

एशियन गेम्स से पहले भी आई मुश्किल

Neeru को एशियन गेम्स से ठीक पहले फ्लू हो गया था। बीमारी के कारण उनकी जापान रवाना होने की योजना में भी देरी हुई और उनका प्रस्थान चार दिन आगे बढ़ गया। इसके बावजूद उन्होंने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और शूटिंग में शानदार प्रदर्शन करते हुए कई पदक अपने नाम किए।

हरियाणा की बेटियों के लिए बनी प्रेरणा

Kiran Pahal और Neeru Dhanda की कहानियां दिखाती हैं कि खेलों में सफलता केवल मैदान पर प्रदर्शन का परिणाम नहीं होती, बल्कि इसके पीछे वर्षों की मेहनत और कई व्यक्तिगत चुनौतियों का सामना भी शामिल होता है।

Kiran ने सामाजिक दबाव और आर्थिक सीमाओं के बीच एथलेटिक्स में अपनी जगह बनाई, जबकि Neeru ने चोट के बाद खेल बदला और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद शूटिंग में देश के लिए पदक जीते।

दोनों खिलाड़ियों की उपलब्धियां हरियाणा में महिला खिलाड़ियों के लिए एक प्रेरक उदाहरण के तौर पर सामने आई हैं। उनके प्रदर्शन से यह भी सामने आया कि उचित अवसर और लगातार मेहनत के साथ ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकती हैं।

संघर्ष से सफलता तक पहुंची दोनों खिलाड़ी

2026 एशियन गेम्स में Kiran Pahal और Neeru Dhanda का प्रदर्शन उनके लंबे संघर्ष का परिणाम रहा। Kiran ने भारतीय महिला 4×400 मीटर रिले टीम के साथ गोल्ड जीता, जबकि Neeru ने शूटिंग में दो गोल्ड और एक सिल्वर पदक हासिल किया।

कुल मिलाकर, हरियाणा की Kiran Pahal और Neeru Dhanda ने 2026 एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन कर अपनी मेहनत और संघर्ष को सफलता में बदला। सामाजिक दबाव, आर्थिक परेशानियों, चोट और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बावजूद दोनों खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के लिए पदक जीते और महिला खिलाड़ियों के लिए एक मजबूत उदाहरण पेश किया।

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