31 अक्तूबर 2026: हरियाणा सरकार की ओर से धान खरीद प्रक्रिया सुचारू होने के दावों के बीच राज्य की अनाज मंडियों में किसानों की परेशानियां जारी हैं। किसानों और किसान संगठनों का आरोप है कि खरीद में देरी, मेरी फसल-मेरा ब्यौरा (MFMB) पोर्टल पर लंबित सत्यापन, प्रति एकड़ खरीद सीमा और धान के धीमे उठान के कारण उन्हें अपनी फसल बेचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन समस्याओं को लेकर राज्य के अलग-अलग इलाकों में विरोध प्रदर्शन भी हो चुके हैं।
खरीद शुरू होने में देरी से बढ़ी परेशानी
किसान संगठनों के अनुसार, इस साल धान की खरीद जल्दी शुरू करने की मांग की गई थी, लेकिन सरकारी खरीद 29 सितंबर से शुरू हुई। किसानों का कहना है कि मंडियों में बड़ी मात्रा में धान पहुंचने के बावजूद खरीद प्रक्रिया समय पर गति नहीं पकड़ सकी।
भारतीय किसान यूनियन (चरुनी) के प्रवक्ता राकेश बैंस ने कहा कि किसान अपनी फसल बेचने के लिए विरोध प्रदर्शन नहीं करना चाहते, लेकिन खरीद में आ रही बाधाओं के कारण उन्हें ऐसा करना पड़ रहा है। उन्होंने MFMB पोर्टल पर लंबित सत्यापन और खरीदे गए धान के धीमे उठान को भी किसानों की परेशानी का कारण बताया।
MFMB पोर्टल का सत्यापन बना चुनौती
किसानों के लिए मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण और फसल का सत्यापन खरीद प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। किसान संगठनों का आरोप है कि पोर्टल पर सत्यापन में देरी के कारण कई किसानों की फसल खरीद के लिए पात्र होने के बावजूद मंडियों में नहीं बिक पा रही है।
किसान नेताओं ने पोर्टल के कथित दुरुपयोग और गलत पंजीकरण के मामलों पर भी सवाल उठाए हैं। पिहोवा और इस्माइलाबाद क्षेत्रों में कुछ किसानों की जमीन पर दूसरे लोगों के नाम से धान की फसल दर्ज किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। ऐसे मामलों में किसानों को अपनी उपज MSP पर बेचने में परेशानी होने का आरोप है।
प्रति एकड़ खरीद सीमा पर भी विवाद
खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के लिए जिलावार प्रति एकड़ धान उत्पादन की सीमा तय की गई थी। किसान संगठनों के अनुसार, अलग-अलग जिलों में यह सीमा 21.39 से 29.26 क्विंटल प्रति एकड़ के बीच रखी गई थी।
किसानों का कहना है कि इस वर्ष कई क्षेत्रों में वास्तविक पैदावार निर्धारित औसत से अधिक हुई है। ऐसे में तय सीमा से ज्यादा धान होने पर किसानों को पूरी उपज सरकारी खरीद केंद्रों पर बेचने में दिक्कत आई। विरोध और मांगों के बाद राज्य सरकार ने सत्यापन के अधीन अतिरिक्त धान खरीदने के लिए नए निर्देश जारी किए।
उठान धीमा होने और MSP से कम कीमत की शिकायत
मंडियों में खरीदे गए धान का समय पर उठान नहीं होने से भी परेशानी बढ़ी है। किसानों का कहना है कि फसल के ढेर मंडियों में पड़े रहने से जगह की कमी होती है और नई उपज रखने में मुश्किल आती है।
कुछ किसान संगठनों ने यह आरोप भी लगाया है कि नमी और अन्य कारणों का हवाला देकर किसानों को MSP से कम कीमत पर धान बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसके अलावा, कमीशन एजेंटों और मिलर्स से जुड़े मुद्दों को भी खरीद प्रक्रिया में बाधा बताया गया है।
किसान संगठनों ने रखीं मांगें
BKU (चरुनी) के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चरुनी ने सरकार से खरीद प्रक्रिया में आ रही समस्याओं को दूर करने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। किसान संगठनों ने अगले सीजन से 15 सितंबर तक खरीद शुरू करने, अगस्त में सत्यापन पूरा करने और मिलर्स व कमीशन एजेंटों से जुड़े मुद्दों को सितंबर के पहले सप्ताह तक सुलझाने की मांग रखी है।
फिलहाल, किसानों की शिकायतों और सरकार के सुचारू खरीद के दावों के बीच मंडियों में खरीद, सत्यापन और उठान की स्थिति पर नजर बनी हुई है। इन समस्याओं का समाधान होने पर ही किसानों को अपनी फसल बेचने में राहत मिल सकेगी।
