• Fri. Oct 16th, 2026

हरियाणा में साइबर सुरक्षा व्यवस्था के आधुनिकीकरण को मंजूरी, ₹738 करोड़ होंगे खर्च

16 अक्तूबर 2026: हरियाणा सरकार ने राज्य की साइबर सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने और सरकारी डिजिटल सेवाओं को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए 738 करोड़ रुपये की दो बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दी है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई राज्य स्तरीय सूचना प्रौद्योगिकी संचालन समिति (IT PRISM) की 51वीं बैठक में इन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इनमें 269 करोड़ रुपये की हरियाणा डिजिटल कवच सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर (H-SOC) परियोजना और 469 करोड़ रुपये की हरियाणा स्टेट डेटा सेंटर 2.0 (HSDC 2.0) परियोजना शामिल हैं। इनका उद्देश्य सरकारी नेटवर्क, डेटाबेस और ऑनलाइन सेवाओं को साइबर हमलों से सुरक्षित करना तथा डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाना है।

हरियाणा डिजिटल कवच पर खर्च होंगे ₹269 करोड़

दोनों परियोजनाओं में हरियाणा डिजिटल कवच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके तहत राज्य स्तर पर एक आधुनिक साइबर सुरक्षा संचालन केंद्र स्थापित किया जाएगा। यह केंद्र सरकारी विभागों के नेटवर्क, एप्लिकेशन, डेटाबेस और महत्वपूर्ण डिजिटल प्रणालियों की चौबीसों घंटे निगरानी करेगा। फिलहाल विभिन्न विभागों में साइबर सुरक्षा से संबंधित व्यवस्थाएं अलग-अलग स्तरों पर संचालित होती हैं। नई व्यवस्था के तहत इन क्षमताओं को एकीकृत करके साइबर खतरों की पहचान और उनसे निपटने के लिए समन्वित प्रणाली विकसित की जाएगी।

इस केंद्र में सिक्योरिटी इन्फॉर्मेशन एंड इवेंट मैनेजमेंट (SIEM), स्वचालित घटना प्रतिक्रिया प्रणाली, एंडपॉइंट डिटेक्शन एंड रिस्पॉन्स और एकीकृत थ्रेट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। इनकी मदद से संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने, साइबर हमलों का विश्लेषण करने और सुरक्षा संबंधी घटनाओं पर तेजी से कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।

परियोजना को लागू करने के लिए नौ महीने की अवधि प्रस्तावित है। इसके बाद पांच साल तक इसके संचालन का प्रावधान है। कुल 269 करोड़ रुपये की लागत में से 25 करोड़ रुपये विश्व बैंक की प्रस्तावित सहायता के जरिए हरियाणा एआई विकास परियोजना के तहत जुटाए जाएंगे, जबकि शेष 244 करोड़ रुपये राज्य सरकार उपलब्ध कराएगी।

₹469 करोड़ से आधुनिक होगा स्टेट डेटा सेंटर

दूसरी परियोजना हरियाणा स्टेट डेटा सेंटर 2.0 से जुड़ी है, जिसके लिए 469 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। इसका उद्देश्य राज्य के मौजूदा डेटा सेंटर के पुराने तकनीकी ढांचे को बदलकर अधिक आधुनिक, सुरक्षित और जरूरत के अनुसार विस्तार योग्य व्यवस्था तैयार करना है।

चंडीगढ़ स्थित नया सचिवालय परिसर में संचालित मौजूदा स्टेट डेटा सेंटर अगस्त 2012 से काम कर रहा है। यह करीब 74 सरकारी विभागों, बोर्डों और निगमों को डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने में सहयोग देता है। समय के साथ पुराने उपकरणों, नेटवर्किंग व्यवस्था की सीमाओं और कंप्यूटिंग क्षमता की कमी के कारण इसके आधुनिकीकरण की जरूरत महसूस की जा रही है। इसके अलावा, समर्पित आपदा रिकवरी सुविधा की कमी भी एक प्रमुख चुनौती है।

नई परियोजना के तहत उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग प्रणाली, आधुनिक डेटा स्टोरेज, जीपीयू आधारित तकनीक के अनुकूल सिस्टम और उन्नत नेटवर्किंग ढांचा विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही साइबर सुरक्षा नियंत्रणों को भी मजबूत किया जाएगा। प्रस्तावित सुविधा की शुरुआती बिजली क्षमता 72 केवीए होगी, जिसे भविष्य में जरूरत के अनुसार बढ़ाकर 300 केवीए तक किया जा सकेगा। इससे राज्य की बढ़ती डिजिटल जरूरतों के अनुरूप कंप्यूटिंग और डेटा स्टोरेज क्षमता का विस्तार करने में मदद मिलेगी।

सरकारी ऑनलाइन सेवाओं को मिलेगा सुरक्षा कवच

हरियाणा में सरकारी कामकाज और नागरिक सेवाओं के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बढ़ रहा है। ऐसे में सरकारी डेटा की सुरक्षा, ऑनलाइन सेवाओं की उपलब्धता और तकनीकी प्रणालियों की विश्वसनीयता महत्वपूर्ण हो गई है। साइबर हमले या तकनीकी खराबी की स्थिति में सरकारी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं और संवेदनशील जानकारी को खतरा पैदा हो सकता है।

नई परियोजनाओं का उद्देश्य इन जोखिमों को कम करना और डिजिटल सेवाओं को अधिक भरोसेमंद बनाना है। एकीकृत सुरक्षा संचालन केंद्र के माध्यम से संभावित खतरों की निगरानी और उन पर कार्रवाई को बेहतर तरीके से समन्वित किया जा सकेगा। वहीं, आधुनिक डेटा सेंटर सरकारी प्रणालियों को अधिक कंप्यूटिंग क्षमता और सुरक्षित तकनीकी आधार उपलब्ध कराएगा।

डिजिटल प्रशासन को आधुनिक बनाने की दिशा में कदम

इन परियोजनाओं के साथ हरियाणा सरकार डिजिटल प्रशासन की क्षमता बढ़ाने पर भी काम कर रही है। बैठक में नागरिक सेवाओं से जुड़े सरल 2.0 प्लेटफॉर्म के विकास और क्रियान्वयन पर भी चर्चा हुई। हालांकि, इसके लागू होने की समयसीमा और नई सुविधाओं के बारे में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

कुल मिलाकर, 738 करोड़ रुपये की ये दोनों परियोजनाएं हरियाणा के सरकारी डिजिटल ढांचे को आधुनिक बनाने की योजना का हिस्सा हैं। इनके प्रभावी क्रियान्वयन से साइबर खतरों की पहचान, सरकारी डेटा की सुरक्षा और ऑनलाइन सेवाओं की निरंतरता में सुधार लाने का लक्ष्य है। वास्तविक लाभ परियोजनाओं के समय पर पूरा होने और उनके प्रभावी संचालन पर निर्भर करेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *