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गुरुग्राम में जनवरी 2027 तक 94 ट्यूबवेल बंद करने की तैयारी, जानें क्या है वजह

16 अक्तूबर 2026: हरियाणा के गुरुग्राम में लगातार गिरते भूजल स्तर और पीने के पानी की कमी को देखते हुए नगर निगम गुरुग्राम (MCG) ने जनवरी 2027 तक 94 ट्यूबवेल बंद करने का प्रस्ताव तैयार किया है। यह कदम शहर में भूजल पर निर्भरता कम करने और पानी के संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करने की योजना का हिस्सा है। प्रस्ताव के अनुसार, इन ट्यूबवेलों को अगले 90 दिनों के भीतर चरणबद्ध तरीके से बंद किया जाना है।

क्यों बंद किए जा रहे हैं 94 ट्यूबवेल?

नगर निगम के इस फैसले के पीछे मुख्य कारण भूजल का जरूरत से ज्यादा दोहन है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरुग्राम में पानी की कमी और तेजी से गिरते भूजल स्तर पर चिंता जताई थी। अदालत ने अधिकारियों को ऐसे क्षेत्रों में भूजल निकालने पर निर्भरता कम करने के उपाय करने को कहा है, जहां नहर के पानी की पाइपलाइन के माध्यम से पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध है।

नगर निगम के प्रस्ताव में कुल 581 ट्यूबवेलों में से 94 को बंद करने की बात कही गई है। ये ट्यूबवेल उन सेक्टरों और विकसित शहरी क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMDA) की ओर से नहर आधारित पानी की पर्याप्त आपूर्ति की जा रही है। ऐसे क्षेत्रों में ट्यूबवेलों को बंद करके भूजल के इस्तेमाल में कमी लाने की योजना है।

रोजाना 97 लाख लीटर भूजल की बचत का लक्ष्य

प्रस्तावित योजना लागू होने के बाद इन 94 ट्यूबवेलों से होने वाले भूजल दोहन में प्रतिदिन लगभग 97 लाख लीटर की कमी आने का अनुमान है। शेष 487 ट्यूबवेलों को तुरंत बंद नहीं किया जाएगा। उनसे मिलने वाली लगभग 5.03 करोड़ लीटर प्रतिदिन की जल आपूर्ति की समीक्षा हर तीन महीने में की जाएगी। इन ट्यूबवेलों को चरणबद्ध तरीके से बंद करने का फैसला GMDA की नहर आधारित जल आपूर्ति स्थिर होने के बाद लिया जाएगा।

गुरुग्राम में भूजल की स्थिति चिंताजनक

केंद्रीय भूजल बोर्ड के 2024 के आकलन के अनुसार, गुरुग्राम शहरी क्षेत्र में भूजल दोहन का स्तर 326.52 प्रतिशत दर्ज किया गया था। इसका अर्थ है कि क्षेत्र में सालाना भूजल दोहन, हर वर्ष दोबारा उपलब्ध होने वाले भूजल संसाधन से तीन गुने से भी अधिक है। यह स्थिति लंबे समय में शहर की जल उपलब्धता के लिए गंभीर चुनौती पैदा कर सकती है।

शहर में मानसून के दौरान जलभराव की समस्या भी सामने आती है, लेकिन बारिश के पानी का पर्याप्त हिस्सा जमीन के भीतर पहुंचकर भूजल स्तर बढ़ाने में इस्तेमाल नहीं हो पाता। हाईकोर्ट ने भी बारिश के पानी को संरक्षित करने और भूजल रिचार्ज की व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया है।

पार्कों में इस्तेमाल होगा ट्रीट किया हुआ पानी

भूजल पर दबाव कम करने के लिए नगर निगम सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से उपचारित पानी के इस्तेमाल का दायरा भी बढ़ाने की योजना बना रहा है। इस पानी की आपूर्ति पार्कों में सिंचाई के लिए की जाएगी, ताकि साफ पीने योग्य पानी का उपयोग गैर-पीने वाले कामों में कम किया जा सके।

फिलहाल उपचारित पानी की पाइपलाइन का नेटवर्क 49.8 किलोमीटर लंबा है और इससे 142 पार्कों को पानी मिलता है। मार्च 2027 तक इस नेटवर्क को बढ़ाकर लगभग 104.95 किलोमीटर करने और 312 पार्कों तक पहुंचाने का प्रस्ताव है। विस्तार पूरा होने पर 170 अतिरिक्त पार्कों को उपचारित पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा।

बारिश के पानी को जमीन में पहुंचाने की तैयारी

योजना में रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं की सफाई, मरम्मत और नई संरचनाओं के निर्माण को भी शामिल किया गया है। नगर निगम के अनुसार, शहर में मौजूद 408 पारंपरिक वर्षा जल संचयन संरचनाओं में से 173 की सफाई और 114 की मरम्मत की जा चुकी है। इसके अलावा 35 नई संरचनाएं बनाई गई हैं। बाकी संरचनाओं की सफाई और मरम्मत का काम भी योजना के तहत पूरा किया जाना है।

नगर निगम का अनुमान है कि कुल 443 पारंपरिक संरचनाएं चार घंटे की बारिश के दौरान लगभग 95.7 लाख लीटर पानी को भूजल के रूप में रिचार्ज करने में मदद कर सकती हैं। इन कार्यों को मई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही 277 मॉड्यूलर रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं पर भी काम चल रहा है।

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