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बागवानी और खेतों की सैर से बच्चों का प्रकृति से जुड़ाव बढ़ेगा

23 जून 2026 :  Ludhiana के विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को बागवानी गतिविधियों और खेतों की सैर से जोड़ने से उनका प्रकृति के साथ संबंध मजबूत हो सकता है। साथ ही यह पहल मोबाइल, टीवी और अन्य डिजिटल उपकरणों पर बिताए जाने वाले समय को कम करने में भी सहायक साबित हो सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक जीवनशैली में बच्चे पहले की तुलना में अधिक समय स्क्रीन के सामने बिताते हैं। इससे शारीरिक गतिविधियों में कमी और प्रकृति से दूरी बढ़ रही है। ऐसे में उन्हें पौधे लगाने, उनकी देखभाल करने और खेतों के वातावरण को समझने का अवसर देना फायदेमंद हो सकता है।

बागवानी जैसी गतिविधियां बच्चों में जिम्मेदारी, धैर्य और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करती हैं। पौधों की वृद्धि को करीब से देखने से उनमें सीखने की उत्सुकता भी बढ़ती है और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को समझने का अवसर मिलता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि खेतों के दौरे बच्चों को कृषि, खाद्य उत्पादन और ग्रामीण जीवन के बारे में व्यावहारिक जानकारी देते हैं। इससे उन्हें यह समझने में मदद मिलती है कि भोजन उनके घर तक पहुंचने से पहले किन प्रक्रियाओं से होकर गुजरता है।

मनोवैज्ञानिकों का भी मानना है कि खुले वातावरण में समय बिताने से बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य बेहतर हो सकता है। प्राकृतिक परिवेश तनाव कम करने, रचनात्मकता बढ़ाने और शारीरिक सक्रियता को प्रोत्साहित करने में मदद करता है।

अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे बच्चों को नियमित रूप से बाहरी गतिविधियों में शामिल करें और उन्हें प्रकृति के साथ समय बिताने के अवसर प्रदान करें। विशेषज्ञों के अनुसार, यह न केवल स्क्रीन टाइम कम करेगा बल्कि बच्चों के समग्र विकास में भी सकारात्मक योगदान देगा।

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