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अमृतसर में मंत्री के घर के बाहर प्रदर्शन की तैयारी, किसानों ने ट्रैक्टर से जमीन समतल की

14 सितंबर, 2026 पंजाब में किसानों का आंदोलन एक बार फिर तेज होने जा रहा है। किसान मजदूर मोर्चा की ओर से सोमवार को राज्यव्यापी प्रदर्शन का आह्वान किया गया है। इसी के तहत अमृतसर में पीडब्ल्यूडी मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ के न्यू अमृतसर स्थित आवास के पास किसानों ने प्रदर्शन स्थल तैयार करना शुरू कर दिया है। किसानों ने रविवार को ट्रैक्टर और अर्थमूविंग मशीनों की मदद से खुले मैदान को समतल किया और वहां जमा कचरे तथा मलबे को भी हटाया।

मंत्री के आवास के पास तैयार किया गया प्रदर्शन स्थल

किसान मजदूर मोर्चा की ओर से प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए मंत्री के आवास के सामने स्थित खुले मैदान को चुना गया है। प्रदर्शन से पहले किसानों ने मैदान को साफ करने और समतल करने का काम किया, ताकि बड़ी संख्या में आने वाले किसानों और मजदूरों के लिए वहां व्यवस्था की जा सके।

रिपोर्ट के अनुसार, किसानों ने रविवार को ट्रैक्टर और अन्य मशीनों का इस्तेमाल कर मैदान को प्रदर्शन के लिए तैयार किया। संगठन की ओर से सोमवार से यहां किसानों के जुटने की बात कही गई है।

किन मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसान?

किसान मजदूर मोर्चा ने किसानों और मजदूरों से जुड़े कई मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन का आह्वान किया है। संगठन की प्रमुख मांगों में बिजली और खाद की कमी का तत्काल समाधान करना शामिल है।

इसके अलावा किसान बासमती चावल, मक्का, मूंग, सरसों और आलू जैसी फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी पर खरीद सुनिश्चित करने की मांग भी कर रहे हैं।

किसानों की एक प्रमुख मांग पूर्ण कर्ज माफी की भी है। उनका कहना है कि खेती से जुड़े लोगों पर बढ़ते आर्थिक दबाव को देखते हुए सरकार को कर्ज राहत के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।

बाढ़ और भूजल संकट का मुद्दा भी उठाया

किसान मजदूर मोर्चा ने बाढ़ से होने वाले नुकसान को लेकर भी सरकार से प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। संगठन बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए स्थायी और प्रभावी उपाय चाहता है।

इसके साथ ही पंजाब में लगातार गिरते भूजल स्तर को लेकर भी किसानों ने चिंता जताई है। मोर्चा भूजल संरक्षण के लिए ठोस समाधान की मांग कर रहा है, ताकि आने वाले समय में खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका गंभीर असर न पड़े।

लैंड पूलिंग नीति वापस लेने की मांग

किसानों के विरोध के प्रमुख मुद्दों में पंजाब की लैंड पूलिंग नीति भी शामिल है। संगठन इस नीति को वापस लेने की मांग कर रहा है।

इसके अलावा भारतमाला परियोजनाओं के लिए कथित तौर पर जबरन जमीन अधिग्रहण किए जाने का मुद्दा भी उठाया गया है। किसान संगठन का कहना है कि किसानों की जमीन से जुड़े मामलों में उनकी सहमति और हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों के लिए मुआवजा और नौकरी

किसान मजदूर मोर्चा ने उन किसानों और मजदूरों के परिवारों के लिए मुआवजा तथा सरकारी नौकरी की मांग भी रखी है, जिनकी मौत आत्महत्या के कारण हुई है।

संगठन का कहना है कि ऐसे परिवारों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा देने के लिए सरकार को ठोस नीति बनानी चाहिए। किसानों के अनुसार, संकट से प्रभावित परिवारों को केवल तत्काल राहत के बजाय लंबे समय तक सहायता उपलब्ध कराना जरूरी है।

पंजाब के कई शहरों में प्रदर्शन की तैयारी

किसान मजदूर मोर्चा ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन की योजना बनाई है। अमृतसर के अलावा संगरूर, पठानकोट, होशियारपुर, मुक्तसर साहिब, जालंधर और लुधियाना में भी मंत्रियों के आवास के बाहर प्रदर्शन प्रस्तावित हैं।

इसके अलावा फरीदकोट में पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां के आवास के बाहर भी प्रदर्शन की तैयारी की गई है। इस तरह संगठन ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में सरकार तक अपनी मांगें पहुंचाने की रणनीति बनाई है।

सरकार से बातचीत की मांग

किसान मजदूर मोर्चा के नेता सरवन सिंह पंधेर के अनुसार, किसान सोमवार से प्रदर्शन स्थल पर जुटना शुरू करेंगे। संगठन ने संकेत दिया है कि अगर सरकार किसानों की मांगों पर बातचीत नहीं करती और समाधान की दिशा में कदम नहीं उठाती, तो आगे की रणनीति तय की जाएगी।

संगठन के अनुसार, 16 सितंबर को उसके नेता बैठक कर आंदोलन के अगले चरण पर फैसला करेंगे। इससे साफ है कि किसानों की ओर से सरकार पर बातचीत और मांगों के समाधान के लिए दबाव बढ़ाने की तैयारी है।

प्रदर्शन को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल

किसानों के इस प्रदर्शन से पंजाब में कृषि और किसान मुद्दों को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ने की संभावना है। बिजली, खाद, एमएसपी, कर्ज माफी, बाढ़, भूजल और जमीन अधिग्रहण जैसे मुद्दे लंबे समय से पंजाब की राजनीति में अहम रहे हैं।

अमृतसर में मंत्री के आवास के पास प्रदर्शन स्थल तैयार किए जाने के बाद अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार और किसान संगठनों के बीच बातचीत होती है या आंदोलन आगे और तेज होता है।

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