3 जून 2026 : बरनाला में पर्यावरण कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों ने पेड़ों की कथित अवैध कटाई का आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में पेड़ों को काटे जाने की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो सकता है।
कार्यकर्ताओं के अनुसार, यदि कटाई बिना आवश्यक अनुमति या निर्धारित नियमों का पालन किए की गई है, तो इसकी विस्तृत जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने संबंधित विभागों से घटनास्थल का निरीक्षण करने और पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने की मांग की है।
अधिकारियों की ओर से मामले की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पेड़ों की कटाई नियमों के अनुसार हुई थी या नहीं। फिलहाल आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पर्यावरण विज्ञान के विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पेड़ केवल हरित आवरण बढ़ाने का काम नहीं करते, बल्कि वायु गुणवत्ता सुधारने, तापमान नियंत्रित रखने और जैव विविधता को संरक्षित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी विकास परियोजना या अन्य कार्य के लिए पेड़ काटने से पहले पर्यावरणीय नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक होता है। कई मामलों में प्रतिपूरक वृक्षारोपण (Compensatory Plantation) भी अनिवार्य किया जाता है।
वन प्रबंधन के जानकारों का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण और विकास कार्यों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। इसके लिए पारदर्शी प्रक्रिया और नियमित निगरानी महत्वपूर्ण होती है।
स्थानीय लोगों ने भी मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
फिलहाल, सभी की नजरें जांच प्रक्रिया और संबंधित विभागों की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।
