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पंजाब सरकार ने पांच लाख एकड़ में डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस का लक्ष्य तय किया

26 मई 2026 :  पंजाब सरकार ने इस वर्ष लगभग पांच लाख एकड़ क्षेत्र में डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस (DSR) तकनीक अपनाने का लक्ष्य तय किया है। इस पहल का उद्देश्य भूजल संरक्षण, कृषि लागत में कमी और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना बताया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, पारंपरिक धान रोपाई की तुलना में DSR तकनीक में खेतों में सीधे बीज बोए जाते हैं, जिससे पानी और श्रम दोनों की बचत हो सकती है।

पंजाब कृषि विभाग किसानों को इस तकनीक को अपनाने के लिए जागरूकता और प्रोत्साहन कार्यक्रम चला रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार किसानों को मशीनरी, तकनीकी मार्गदर्शन और कुछ मामलों में वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने पर भी काम कर रही है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि पंजाब में लगातार गिरते भूजल स्तर को देखते हुए DSR तकनीक को महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

कृषि विज्ञान से जुड़े जानकारों के अनुसार, DSR पद्धति से खेतों में पानी की खपत कम हो सकती है और धान की खेती अधिक टिकाऊ बन सकती है।

हालांकि, विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि इस तकनीक के सफल उपयोग के लिए उचित समय पर बुवाई, खरपतवार नियंत्रण और तकनीकी प्रशिक्षण जरूरी होता है।

पंजाब देश के प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में शामिल है, जहां खेती में भूजल का अत्यधिक उपयोग लंबे समय से चिंता का विषय रहा है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बड़े स्तर पर DSR अपनाई जाती है, तो इससे जल संरक्षण और ऊर्जा बचत दोनों में मदद मिल सकती है।

भारत में कई राज्य अब टिकाऊ खेती और जल संरक्षण आधारित कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने पर जोर दे रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, सरकार इस सीजन में DSR के प्रदर्शन और किसानों की प्रतिक्रिया पर विशेष नजर रखेगी। सफल परिणाम मिलने पर भविष्य में इसका दायरा और बढ़ाया जा सकता है।

किसानों का कहना है कि यदि तकनीकी सहायता और बाजार समर्थन मजबूत मिले, तो नई खेती तकनीकों को अपनाने में अधिक आसानी होगी।

फिलहाल, कृषि विभाग गांव-गांव जाकर किसानों को DSR तकनीक के फायदे और उपयोग के बारे में जानकारी दे रहा है। आने वाले महीनों में खरीफ सीजन के दौरान इसका प्रभाव स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है।

यह घटनाक्रम यह दर्शाता है कि पंजाब अब पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक और जल-संरक्षण आधारित कृषि मॉडल की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

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